मुख्यमंत्री ने कहा कि कम खर्चे में बेहतर सुरक्षा के लिहाज से बहुमंजिली बैरक बनाई जाएं। जेल में तैनात कर्मचारियों और वहां बंद अपराधियों का गठजोड़ तोड़ने के लिए हर दो महीने में नए कर्मचारियों को तैनात करें। छह माह में जेलों की व्यवस्था में सुधार दिखने चाहिए। इसके लिए उन्होंने प्रतिनियुक्ति पर 1500 पुलिसकर्मियों की तत्काल नियुक्ति के साथ ही भोजन की गुणवत्ता सुधारने के भी निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, इटावा और प्रयागराज में निर्माणाधीन जेलों के काम की प्रगति और कार्यदायी संस्था के बारे में जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिया कि समय से काम पूरा न करने वाली कार्यदायी संस्थाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हर माह जिला निगरानी समिति की बैठक होती है। इस बैठक में डीएम और एसएसपी को जिला जज से बात कर जेलों में ही न्यायिक सुनवाई सुनिश्चित करनी चाहिए। राजनीतिक मुकदमे अनावश्यक रूप से उत्पीड़न का जरिया बन गए हैं। इनको समाप्त कराने के लिए भी कदम उठाएं।
भ्रष्टाचार के आरोप में जो कर्मचारी बर्खास्त या निलंबित हुए हैं, उनको कोर्ट से राहत न मिलने देने के लिए प्रभावी पैरवी की जाए।
उन्होंने निर्देश दिया कि स्वतंत्रता दिवस, शिक्षक दिवस व पंडित दीनदयाल उपाध्याय जयंती और गांधी जयंती पर तय संख्या में कैदियों को रिहा करें। 70 साल से अधिक उम्र के बीमार कैदियों की रिहाई पर भी विचार करें।
बैठक में लखनऊ में प्रस्तावित पुलिस एवं फॉरेंसिक साइंस विश्वविद्यालय की स्थापना पर भी चर्चा हुई। इसके लिए 144 एकड़ जमीन उपलब्ध है।
विश्वविद्यालय के साथ यहां एक प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना के भी निर्देश दिए। हर रेंज में फॉरेंसिक लैब की स्थापना और उनमें डिग्री व डिप्लोमा के पाठ्यक्रम शुरू करने के भी निर्देश दिए।