गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में अगस्त 2017 में ऑक्सीजन की कमी से हुई 70 बच्चों की मौत के मामले में आरोपी डॉ. कफील को क्लीन चिट मिलने के मामले में नया मोड़ आ गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने कहा है कि डॉ. कफील ने रिपोर्ट का गलत निष्कर्ष निकाला है।
वहीं, कफील खान ने शनिवार को मांग की कि उन्हें सम्मान के साथ बहाल किया जाना चाहिए। बता दें कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज में अगस्त 2017 में ऑक्सीजन की कमी से हुई 70 बच्चों की मौत के मामले में आरोपी डॉ. कफील को चार मामलों में से सिर्फ एक में ही क्लीन चिट मिली है। आरोप है कि घटना के वक्त 100 बेड के एईएस वार्ड के नोडल प्रभारी डॉ. कफील ही थे, जबकि जांच में यह आरोप निराधार पाया गया है।
शुक्रवार को डॉ. कफील खान को पूरे मामले में क्लीन चिट मिलने की खबरें आती रहीं, जबकि शासन के अनुसार उनके खिलाफ अभी विभागीय जांच चल रही है और अंतिम कार्रवाई बाकी है। वहीं, शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने एक बयान में कहा है कि यह कहना सही नहीं कि डॉ. कफील को विभागीय जांच में क्लीन चिट मिल गई है। उन्होंने रिपोर्ट का गलत निष्कर्ष निकाला है।
डॉ. कफील को सिर्फ एक मामले में मिली क्लीन चिट
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के ऑक्सीजन कांड में आरोपी बनाए गए बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कफील खान को सिर्फ एक मामले में ही क्लीनचिट मिली है। तत्कालीन प्रमुख सचिव स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन हिमांशु कुमार ने लगभग छह महीने पहले शासन को सौंपी अपनी जांच रिपोर्ट में उन्हें 100 बेड के एईएस वार्ड के नोडल ऑफिसर मामले में क्लीनचिट दी थी। हालांकि इस रिपोर्ट के आने के बाद भी डॉ. कफील को बहाल नहीं किया गया है।
शासन ने हिमांशु कुमार से पूरे मामले की जांच कराई थी। प्रमुख सचिव की जांच में डॉ. कफील के खिलाफ लापरवाही के साक्ष्य नहीं मिले। इसी आधार पर प्रमुख सचिव ने 18 अप्रैल 2019 को शासन को रिपोर्ट भेजी थी, जिसमें कहा गया था कि डॉ. कफील के पास 100 बेड वार्ड के नोडल अधिकारी का चार्ज नहीं था और न ही वह ऑक्सीजन की आपूर्ति के मामले में किसी कमेटी में थे।
छह महीने बाद सामने आई इस रिपोर्ट को डॉ. कफील की ओर से मेडिकल कॉलेज प्रशासन से लेकर अन्य जिम्मेदारों के पास भेजा गया। डॉ. कफील ने निलंबन वापसी की गुहार भी लगाई लेकिन कुछ हुआ नहीं। इस संबंध में जांच अधिकारी हिमांशु कुमार से पक्ष जानने की कोशिश की गई, मगर उन्होंने फोन नहीं उठाया।
डॉ. कफील अहमद खान के खिलाफ विभागीय जांच अभी जारी है। उन्हें 100 बेड के एईएस वार्ड के नोडल ऑफिसर मामले में क्लीनचिट मिली है, उनके खिलाफ अन्य कई गंभीर मामले हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. राजनीश दुबे, प्रमुख सचिव, चिकित्सा शिक्षा
मुझे सम्मान सहित बहाल करना चाहिए : डॉ. कफील
वहीं, कफील खान ने शनिवार को मांग की कि उन्हें सम्मान के साथ बहाल किया जाना चाहिए। गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में 2017 में ऑक्सीजन की कमी के चलते कई बच्चों की जान चली गई थी। खान को इसी मामले में भ्रष्टाचार और मेडिकल लापरवाही के आरोप में निलंबित किया गया था।
कफील ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार को मृतक बच्चों के परिजनों से माफी मांगनी चाहिए और उन्हें मुआवजा देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि विभागीय जांच में पता चला है कि उन्होंने कोई लापरवाही नहीं की न भ्रष्टाचार में शामिल थे।
उन्होंने कहा, ‘हत्यारा कफील’ और ‘कुख्यात डॉक्टर कफील’ का दाग उनके सिर से हट गया है। कफील ने मांग की है कि इस मामले की जांच सीबीआई से या उत्तर प्रदेश के बाहर कोर्ट की निगरानी में होनी चाहिए।