समाजवादी आवास योजना के तहत लखनऊ, मेरठ और गाजियाबाद में 15 से 30 लाख रुपये के 10 हजार अर्फोडेबल फ्लैट बनाए जाएंगे। हाउसिंग बोर्ड की बैठक में इस योजना पर मुहर लगा दी गई। राजधानी लखनऊ में इसके लिए अप्रैल से पंजीकरण शुरू करने की तैयारी है। यह फैसला प्रमुख सचिव आवास सदाकांत की अध्यक्षता में हुई आवास विकास परिषद बोर्ड की बैठक में बृहस्पतिवार को लिया गया।
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राज्य सरकार शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को कम कीमत पर फ्लैट उपलब्ध कराना चाहती है। इसके लिए समाजवादी आवास योजना के तहत अर्फोडेबल फ्लैट बनाने की नीति लाई गई है।
विकास प्राधिकरण, आवास विकास परिषद के साथ निजी विकासकर्ताओं से भी फ्लैट बनवाए जा सकते हैं। अपर आवास आयुक्त व सचिव रुद्र प्रताप सिंह ने बताया कि मेरठ के सेक्टर 11 में इस योजना के फ्लैट बनाने के लिए प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृतियां इस शर्त के साथ दिया गया है कि जल्द ही काम शुरू कराया जाए।
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इसके अलावा सिद्धार्थ विहार योजना गाजियाबाद के सेक्टर 7 में गंगा, यमुना व हिंडन अपार्टमेंट की अवशेष लागत 7485.28 लाख रुपये की मंजूरी दी गई। मंडोल विहार योजना गाजियाबाद के सेक्टर 7 में 1856 फ्लैट अपार्टमेंट में बनाने के लिए 56999.47 लाख रुपये की मंजूरी दी गई है।
लखनऊ में इन जगहों पर बनेंगे अर्फोडेबल फ्लैट
लखनऊ में सुल्तानपुर रोड पर अवध विहार योजना के सेक्टर 7-डी में 2,824 फ्लैट बनाए जाएंगे, इसमें 2,344 सामान्य व 480 स्ववित्त पोषित होंगे। इसी योजना के सेक्टर 8 में 2,804 फ्लैट बनाए जाएंगे, इसमें 1,968 सामान्य व 336 स्ववित्त पोषित होंगे।
वृंदावन योजना के सेक्टर 20 में 2,504 फ्लैट बनाए जाएंगे, इसमें 2,400 सामान्य व 104 स्ववित्त पोषित होंगे। हरदोई रोड स्थित आम्रपाली योजना के सेक्टर एच-6 में 1,260 फ्लैट बनाए जाएंगे, इसमें 1,044 सामान्य और 216 स्ववित्त पोषित होंगे।
पांच हजार करोड़ की जमीनों का होगा सेटलमेंट हाउसिंग बोर्ड की सूबे में करीब 5000 करोड़ की जमीनें फंसी हुई हैं। नतीजतन इन जमीनों पर न तो योजनाएं आ पा रही हैं और न ही इसका सेटेलमेंट हो पा रहा है। इसलिए बोर्ड की बैठक में एक सेटेलमेंट कमेटी बनाने का निर्णय किया गया है।
यह कमेटी इन जमीनों का सेटलमेंट के लिए लोगों से बातचीत कर इसका समाधान निकालेगी। अपर आवास आयुक्त व सचिव रुद्र प्रताप सिंह ने बताया कि सेटलमेंट कमेटी को तीन माह के अंदर इसका निस्तारण करना होगा, जिससे सालों से फंसे मामले का निस्तारण हो सके।
चतुर्थ श्रेणी कर्मियों को समयमान वेतनमान
आवास विकास परिषद में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मियों को भी समयमान वेतनमान का लाभ देने का निर्णय किया गया है। कर्मचारियों को यह लाभ 1 जनवरी 2006 से दिया जाएगा। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी इसके लिए काफी से आंदोलन कर रहे थे।
लखनऊ मेट्रो में चाहिए हिस्सेदारी आवास विकास परिषद लखनऊ में मेट्रो चलाने के लिए 200 करोड़ रुपये मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन को देगा। इसके साथ ही बोर्ड की बैठक में यह भी तय किया गया कि वह कॉर्पोरेशन से इक्वीटि में हिस्सेदारी देने का अनुरोध करेगा ताकि बोर्ड की लखनऊ मेट्रो में अहमियत बनी रहे।
अभियंताओं के पदोन्नति की बाधा दूर आवास विकास परिषद में कार्यरत अभियंताओं के पदोन्नति में नॉन फील्ड जॉब की अनिवार्यता की बाधा को खत्म कर दिया गया है। बोर्ड की बैठक में तय किया गया है कि नॉन फील्ड जॉब यदि अभियंता दो साल नहीं भी करता है तो उसे पदोन्नति दे दी जाएगी।
इसके लिए तर्क दिया गया कि आवास विकास परिषद में नॉन फील्ड जॉब वाले बहुत कम ही पद हैं। इसलिए ऐसे पदों पर तैनाती न हो पाने की वजह से अभियंताओं को पदोन्नति में बाधा आ रही थी।
मेरठ की जागृति विहार योजना में विद्युत सप्लाई के लिए 220 केवी सब स्टेशन बनाने को ग्रीन बेल्ट की 10 एकड़ जमीन ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन को मुफ्त देने का निर्णय किया गया है। तो बोर्ड की बैठक में सिद्धार्थ विहार योजना गाजियाबाद को 12.5 क्यूसेक जलापूर्ति के लिए नगर निगम की जमीन पर जल निगम की प्रस्तावित परियोजना पर 50 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का फैसला लिया गया।
मैनपुरी के सेक्टर 4, 5 व 6 की सड़कों, जलापूर्ति, पार्कों, नालियों व पुलिस तथा अन्य नागरिक सुविधाओं के लिए नगर पालिका परिषद को 40 लाख रुपये देने का निर्णय किया गया।
इसके बाद पालिका परिषद को यह योजनाएं हस्तांतरित हो जाएंगी। गाजियाबाद की मंडोला विहार योजना में जलापूर्ति के लिए ट्यूबवेल लगाने को 975 वर्ग मीटर जमीन मुफ्त देने का निर्णय किया गया।
विभिन्न योजना के लिए लेंगे जमीन विभिन्न योजनाएं लाने के लिए जमीनों को भी लेने का निर्णय लिया गया है। हरदोई यूपी शुगर केन डवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड की चीनी मिल की खाली पड़ी 21.2482 हेक्टेयर जमीन लेने का निर्णय किया गया है।
इसी तरह गोंडा में परिषद की योजना लाने के लिए जिला सहकारी विकास संघ लि. की 13.23 एकड़ जमीन लेने का निर्णय किया गया।