खुशी दुबेलखनऊ। विश्व कप जीतने के बाद देश में महिला क्रिकेट की लोकप्रियता बढ़ी है। भारतीय महिला टीम की उपलब्धियों के बाद मैदान पर बल्ले और गेंद से जूझतीं महिला खिलाडि़यों के प्रति लोगों का सोच बदला है।
विश्व कप टीम का हिस्सा रहीं अर्चना देवी हों या फिर अन्य खिलाड़ी जिनके सामने सामाजिक, पारिवारिक चुनौतियां रहीं लेकिन इन चुनौतियों का सामना उन्होंने बल्ले से किया और आज अपने शहर और राज्य का मान बढ़ा रही हैं। सेज क्रिकेट ग्राउंड में चल रही वीमेंस प्रीमियर क्रिकेट लीग में शामिल कई महिला खिलाडि़यों ने बातचीत के दौरान अपने संघर्षों की दास्तान साझा की।
इन खिलाड़ियों का मानना है कि वीमेंस प्रीमियर क्रिकेट लीग जैसे कदम महिला क्रिकेट को बहुत फायदा पहुंचाएंगे और कॅरिअर के नए रास्ते खोलेंगे।
आर्थिक तंगी भी नहीं बन सकी बाधाः
देश के लिए 2023 में अंडर-19 विश्व कप विजेता टीम की खिलाड़ी उन्नाव के रतईपुरवा की अर्चना देवी ने बताया कि बचपन में पिता के देहांत के बाद परिवार में आर्थिक समस्याएं थीं। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने 2016 से क्रिकेट खेलना शुरू किया। अपनी मेहनत के दम पर वह आगे बढ़ती रहीं और भारतीय क्रिकेट टीम तक का सफर तय किया।
पिता के सपोर्ट से बढीं आगे :
जौनपुर की सोनाली सिंह 2018 से क्रिकेट खेल रही हैं। उन्होंने 10वीं के बाद पिता को क्रिकेट में कॅरिअर बनाने की इच्छा बताई तो उन्होंने सपोर्ट किया। वह लखनऊ आकर प्रैक्टिस करने लगीं। वह अब तक अंडर-16, अंडर-19, अंडर-23 और सीनियर स्तर तक खेल चुकी हैं।
सामाजिक और पारिवारिक बाधाएं : सुल्तानपुर पखरौली की श्रद्धा तिवारी 2019 से क्रिकेट के मैदान पर पसीना बहा रही हैं। बचपन में उनके पिता को उनका क्रिकेट खेलना पसंद नहीं था। हालांकि, भाई और मां ने उन्हें पूरा सपोर्ट दिया। फिर उनके पिता भी समर्थन करने लगे। अब उनके पिता उनके मैचों के लिए बेहद उत्साहित रहते हैं। श्रद्धा अंडर-16, अंडर-19, अंडर 23 और सीनियर मैच खेल चुकी हैं। वह चाहती हैं कि भारतीय महिला टीम दुनियाभर में सर्वश्रेष्ठ बने। वीमेंस प्रीमियर क्रिकेट लीग जैसे कदम इस सफर में मील का पत्थर साबित होंगे।
पहचान बनाने की ललक :
चंदौली निवासी आरजू सिंह 2015 से क्रिकेट खेल रही हैं। क्रिकेट के प्रति उनकी रुचि देखकर माता-पिता ने उन्हें खेलने के लिए वाराणसी भेजा जिसके बाद वह लखनऊ आ गईं। बीते 11 साल में आरजू ने अंडर-19, अंडर-23 और सीनियर मैच खेले हैं। वह क्रिकेटर के रूप में अपनी पहचान बनाना चाहती हैं।
संसाधनों की कमी और समर्थन :
गोंडा की अंशू तिवारी की आर्थिक स्थिति ठीक न होने पर मां ने पैसे उधार लेकर उन्हें किट दिलाई। यूपी वीमेंस क्रिकेट एसोसिएशन की अध्यक्ष प्रियंका शैली मिश्रा ने भी अंशू को सपोर्ट किया। उन्होंेने अंडर-19, अंडर-23 और सीनियर स्तर पर मैच खेले हैं।
अर्चना