छात्रवृत्ति और शुल्क भरपाई योजना में घपले रोकने के लिए नियमों में बदलाव की तैयारी की जा रही है। किसी भी पाठ्यक्रम में पहले परीक्षा पास करनी होगी, तभी उस वर्ष की शुल्क भरपाई की जाएगी। इसके लिए समाज कल्याण निदेशालय ने शासन को संस्तुति भेज दी है। अंतिम निर्णय शासनस्तर से ही किया जाना है।
प्रदेश में अनुसूचित जाति व जनजाति के ढाई लाख रुपये तक सालाना आय और अन्य वर्गों के लिए दो लाख रुपये तक सालाना आय होने पर छात्रवृत्ति के साथ शुल्क की भरपाई की सुविधा मिलती है। हर साल सभी वर्गों के 50 लाख से ज्यादा छात्र इस योजना में लाभांवित होते हैं। देखने में आया है कि तमाम छात्र प्रथम वर्ष में दाखिला लेते हैं और सरकार से फीस वापस लेकर अगले साल लापता हो जाते हैं। इनमें से अधिकतर छात्रों के फर्जी होने की आशंका भी जताई गई है।
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प्रदेश के 11 जिलों में 29 शिक्षण संस्थाओं में हाल ही में इसी तरह की गड़बड़ियां मिली हैं। वर्ष 2017-18 में यहां जितने छात्रों ने दाखिला लिया, योजना का लाभ लेने के बाद अगले साल उनमें से 50 फीसदी या उससे ज्यादा छात्रों ने दाखिला ही नहीं लिया।
इस समस्या से निपटने के लिए शासन को संस्तुति की गई है कि किसी भी पाठ्यक्रम के प्रथम वर्ष की शुल्क प्रतिपूर्ति तभी की जाए, जब विद्यार्थी ने परीक्षा पास करके द्वितीय वर्ष में प्रवेश ले लिया हो। इसी तरह से अगर पाठ्यक्रम तीन वर्ष का हो, तो दूसरे वर्ष की भरपाई तीसरे वर्ष में प्रवेश लेने के बाद ही की जाए। समाज कल्याण विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने के आग्रह के साथ बताया कि शीघ्र ही इस बाबत निर्णय ले लिया जाएगा।