उत्तर प्रदेश में छमाही की जगह खतौनी को वार्षिक रूप से अपडेट करने और नई खतौनी तैयार करने की प्रक्रिया को कंप्यूटरीकृत किए जाने का प्रस्ताव है। इसी तरह खतौनी में निष्क्रांत संपत्ति, शत्रु संपत्ति, वक्फ संपत्ति, रक्षा, रेलवे व अन्य शासकीय विभागों की संपत्तियों के लिए अलग-अलग श्रेणी व कोड दिए जाने की योजना है।
राजस्व परिषद के चेयरमैन प्रवीर कुमार ने यह जानकारी सोमवार को लोक भवन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष भूलेख नियमावली में प्रस्तावित संशोधन के प्रजेंटेशन में दी। प्रवीर ने किसानों द्वारा भूमि को लीज पर देने का ब्यौरा खतौनी में दर्ज करने, जमीन के गैर कृषि उपयोग व परती भूमि आवंटन की स्थिति में उसके यूनिक कोड में बदलाव की योजना भी साझा की।
जमीन के बंधक किए जाने संबंधी ब्यौरा दर्ज करने के लिए बैंकों व वित्तीय संस्थाओं को अधिकृत करने का भी प्रस्ताव है। खसरे के कंप्यूटराइजेशन, खसरे में गाटे का यूनिक कोड दर्ज करने, सिंचाई की नई विधियों को शामिल करने, पड़ताल स्मार्टफोन से कराने, क्रॉप कटिंग में एप का इस्तेमाल, नक्शों में अक्षांश व देशांतर दर्ज करने, लेखपालों की सेवा नियमावलियों में प्रस्तावित संशोधन को शामिल करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा अब तक समय-समय पर जो संशोधन किए गए हैं, उसे संशोधित भूलेख नियमावली में जोड़ने की भी योजना है।
मुख्यमंत्री योगी ने भूलेख नियमावली में प्रस्तावित संशोधन व्यापक विचार-विमर्श और अच्छी तरह से परीक्षण के बाद लागू करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री नेक हा कि भूलेख का त्रुटिरहित होना सबसे महत्वपूर्ण है। प्रजेंटेशन में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव एसपी गोयल व अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।