आज नया वर्ष शुरू हो रहा है, साथ ही विभिन्न वित्तीय और बैंकिंग सेवाओं में बदलावों व सेवा शुल्कों में बढ़त का दौर भी शुरू हो रहा है। एक ओर जहां कर दाताओं को बेहतर सुविधाएं दी जा रही हैं, तो वहीं बड़े लेन-देन नजर रखने के लिए पैन कार्ड के उपयोग को कर विभाग ने अनिवार्य कर दिया है।
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लखनऊ में जहां कैंट में सवार और पीछे की सीट पर बैठे सह-सवार के लिए हैलमेट अनिवार्य हो जाएगा तो वहीं युवाओं के लिए नौकरियों के दौरान समूह ख, ग एवं घ परीक्षाओं में इंटरव्यू व्यवस्था खत्म होने से राहत आएगी। इन सभी बदलावों पर अमर उजाला ने तैयार किया यह विशेष पैकेज।
आज से आयकरदाता कर सकेंगे ऑनलाइन अपील
आयकर विभाग ने करदाताओं को बड़ी सहूलियत के साथ नए साल का आगाज किया है। ताजा इंतजाम के तहत अब विभाग के निर्णय से संतुष्ट न होने की दशा में दाखिल की जाने वाली अपील ऑनलाइन कर दी गई है। एक जनवरी से नया नियम लागू किया गया है। नई व्यवस्था में अब करदाताओं को कमिश्नर (अपील) के कार्यालय के चक्कर लगाने से मुक्ति मिल गई है।
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मौजूदा इंतजाम के तहत यदि कोई करदाता आयकर विभाग द्वारा दिए गए निर्णय से असंतुष्ट होता है तो वह कमिश्नर (अपील) के कार्यालय में अपने तर्कों के साथ अपील दायर करता है।
अब छोटी-छोटी बातों पर नहीं होना होगा परेशान
इसके लिए सारे दस्तावेजों की प्रति कार्यालय में जमा करनी होती है। कई बार कार्यालय के बाबू छोटी-छोटी बात पर करदाता को अनावश्यक रूप से परेशान करते हैं।
अपील की सुनवाई के लिए नोटिस भी डाक या अन्य माध्यमों से भेजा जाता है, जिसमें कई बार देरी हो जाने के चलते सुनवाई में देरी हो जाती है। इस तरह अपील के निस्तारण तक करदाता को कार्यालय के तमाम चक्कर लगाने होते हैं। मगर एक जनवरी से ऑनलाइन अपील दाखिल करने का इंतजाम कर दिया गया है।
इसके लिए सोमवार को सभी आयकर मुख्यालयों को पत्र जारी किया गया है। नई व्यवस्था के तहत जो करदाता ऑनलाइन रिटर्न दाखिल करते हैं, वे इस सुविधा का लाभ ले सकते हैं। अपील के साथ दिए जाने वाले आवश्यक दस्तावेज भी ऑनलाइन दाखिल किए जाएंगे। आयकर विभाग ने इसके लिए फॉर्मेट निर्धारित किया है।
अपील दाखिल होने के बाद अनावश्यक चक्कर लगाने का झंझट खत्म होगा। अपीलकर्ता को एक विशिष्ट नंबर मिल जाएगा, जिससे वह अपनी अपील की स्थिति देख सकेगा। सुनवाई के लिए नोटिस भी ऑनलाइन ही भेजा जाएगा। आयकर सलाहकार सीए पूजा श्रीवास्तव के मुताबिक यह व्यवस्था करदाताओं के हित में है। यह कर सुधारों की दिशा में एक बड़ा कदम है।
बड़े लेनदेन पर पैन जरूरी
हाई वैल्यू ट्रांजेक्शन पर एक जनवरी से पैन अनिवार्य कर दिया गया है। आयकर विभाग द्वारा हाल ही में की गई इस व्यवस्था के तहत दस लाख से अधिक की अचल संपत्ति खरीदने, जनधन को छोड़कर अन्य किसी प्रकार का बैंक खाता खोलने, पचास हजार से ज्यादा के होटल बिल या विदेश यात्रा की टिकटों का भुगतान करने, गैर लिस्टेड कंपनियों के एक लाख से ज्यादा मूल्य के शेयर खरीदने, दो लाख से अधिक की ज्वैलरी खरीदने, साल में पचास हजार से ज्यादा इंश्योरेंस प्रीमियम अदा करने पर अनिवार्य रूप से पैन देना होगा। आयकर विभाग की ओर से किए गए इस इंतजाम को कालेधन के चलन पर सख्ती के तौर पर देखा जा रहा है।
विभागीय अपील की सीमा बढ़ाई नए साल से आयकर विभाग द्वारा दाखिल करने वाली अपील की सीमा में बढ़ोत्तरी की गई है। अभी तक आयकर विभाग पांच लाख से ज्यादा के मामलों को लेकर ट्रिब्युनल में अपील कर सकता था। मगर अब यह सीमा बढ़ाकर दस लाख कर दी गई है। वहीं हाईकोर्ट में जाने के लिए भी आयकर विभाग के लिए सीमा बढ़ाकर दस से पंद्रह लाख कर दी गई है।
सेवाकर की रिफंड व्यवस्था हुई सरल
- नए साल से सेवाकर विभाग की रिफंड व्यवस्था में महत्वपूर्ण परिवर्तन किया गया है। इसके तहत निर्यातकों को सेवाकर का 80 फीसदी रिफंड तत्काल जारी कर दिया जाएगा और बाकी का 20 फीसदी जांच के बाद दिया जाएगा। इसके अलावा सेवाकर चोरी के मामलों में गिरफ्तारी की सीमा भी पचास लाख से बढ़ाकर एक करोड़ कर दी गई है।
कंपनियों के लिए सेंट्रलाइज्ड व्यवस्था - कंपनी मामलों के मंत्रालय ने लिमिटेड, प्राइवेट लिमिटेड समेत अन्य कंपनियों के विभिन्न फॉर्मों की प्रॉसेसिंग की व्यवस्था केंद्रीयकृत कर दी है। इसके तहत हरियाणा के मानेसर में प्रॉसेसिंग सेंटर बनाया गया है।
एक जनवरी से यह केंद्र कार्य आरंभ करेगा। ऐसा होने के बाद कंपनियों को क्षेत्रीय कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने होंगे। सारा काम घर बैठे ऑनलाइन होगा। कंपनी सेकेट्री सुरेंद्र साहू के मुताबिक इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार में कमी आएगी।