मानक के अनुसार सरकार में सीएम समेत 60 मंत्री रह सकते हैं। ऐसे में 17 मंत्री शामिल करने की गुंजाइश बची हुई है। कैबिनेट में सभी पद तो नहीं भरे जाएंगे, लेकिन माना जा रहा है कि 10 से 12 नए मंत्री बनाए जा सकते हैं।
संभावना है कि मंत्रियों के विभागों में भी बड़े स्तर पर फेरबदल किया जाएगा। कैबिनेट के फेरबदल में अधिकतर नए मंत्री राज्यमंत्री स्तर के होंगे। दो-तीन नए मंत्री स्वतंत्र प्रभार या कैबिनेट स्तर के भी हो सकते हैं।
अपना दल के आशीष बन सकते हैं मंत्री
संभावना है कि अपना दल (एस) के एमएलसी आशीष सिंह पटेल को कैबिनेट मंत्री बनाया जाएगा। केंद्र में अनुप्रिया पटेल को मंत्री नहीं बनाए जाने से इसकी संभावना और प्रबल हो गई है। हालांकि अनुप्रिया को केंद्रीय कैबिनेट के अगले विस्तार में मंत्री बनाए जाने की उम्मीद है। 2014 में ऐसा ही हुआ था।
लोकसभा चुनाव में शानदार कामयाबी के बाद मंत्रिमंडल में पिछड़ों व दलितों की नुमाइंदगी बढ़ेगी। अनुसूचित जाति में सर्वाधिक भागीदारी जाटव की है, लेकिन इस वर्ग का कोई मंत्री नहीं है। पश्चिमी यूपी से अति पिछड़ा वर्ग के किसी विधायक को मंत्री बनाया जा सकता है।
जातीय संतुलन साधने के लिए किसी गुर्जर को भी मंत्री बनाया जा सकता है। सांसद चुने जाने के बाद जिन तीन मंत्रियों ने इस्तीफा दिया है, उनमें दो ब्राह्मण व एक एससी हैं। ऐसे में कैबिनेट में कम से कम दो ब्राह्मणों को शामिल किए जाने की संभावना है।
प्रदेश कैबिनेट में फेरबदल व विस्तार की खूब अटकलें लगाई जा रही हैं। कहा जा रहा है कि विस्तार विधानमंडल के मानसून सत्र से पहले होगा या उसके तुरंत बाद। चर्चा सितंबर-अक्तूबर में विस उपचुनावों के बाद की भी है। हालांकि भाजपा नेताओं का कहना है कि इस पर अंतिम निर्णय दिल्ली से होना है।