लखनऊ। विभिन्न संगठनों की आपत्ति के बाद किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में धर्मांतरण के प्रयास के मामले में गठित जांच समिति में बदलाव कर दिया गया है। इसमें अब एक महिला डॉक्टर और सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी को भी शामिल किया गया है। विश्व हिंदू परिषद के साथ हुई बैठक के बाद विवि प्रशासन ने इसका आदेश जारी किया।
केजीएमयू में रेजिडेंट महिला डॉक्टर ने साथी रेजिडेंट डॉक्टर रमीज मलिक पर यौन शोषण करने और धर्मांतरण के प्रयास का आरोप लगाया है। प्रवक्ता प्रो. केके सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच समिति में प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की अध्यक्ष प्रो. अंजू अग्रवाल के साथ सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी भावेश कुमार को शामिल कर लिया है। आरोपी रेजिडेंट डॉक्टर को निलंबित किया जा चुका है। उस पर एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है।
प्रवक्ता के मुताबिक केजीएमयू प्रशासन की ओर से जांच समिति की सोमवार को बैठक भी हुई। कमेटी ने विश्व हिंदू परिषद के उस आरोप को गलत पाया, जिसमें आउटसोर्सिंग कर्मियों में ज्यादातर अल्पसंख्यक वर्ग के होने की बात कही गई है। जांच में पता चला कि आउटसोर्सिंग पर तैनात 3995 कर्मियों में से 289 ही इस वर्ग के हैं। पैथोलॉजी विभाग में संविदा पर तैनात कुल 51 शिक्षकों में से दो ही अल्पसंख्यक वर्ग के हैं। पीपीपी मॉडल पर काम कर रही एजेंसी के 174 कर्मियों में से महज 25 ही अल्पसंख्यक वर्ग के हैं।
बयान जारी करने लिए भी बनाई समिति
केजीएमयू प्रशासन ने धर्मांतरण संबंधी मामले पर बयान जारी करने के लिए भी तीन सदस्यीय समिति बनाई है। इसमें पैरामेडिकल संकाय के डीन प्रो. केके सिंह, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की अध्यक्ष प्रो. अंजू अग्रवाल और प्रॉक्टर प्रो. आरएएस कुशवाहा शामिल हैं। इनके अलावा किसी भी शिक्षक को इस मामले पर बयान देने से मना किया गया है।
ईमेल पर करें धर्मांतरण संबंधी मामलों की शिकायत
केजीएमयू प्रशासन ने परिसर में धर्मांतरण संबंधी किसी भी मामले की शिकायत के लिए ईमेल जारी किया है। factfindingcommitteekgmcindia.edu पर कोई भी सीधे समिति के पास अपनी बात पहुंचा सकता है। इस पर परिसर के साथ आम जनता भी धर्मांतरण संबंधी मामलों की सूचना दे सकती है।