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सिटी बसों के संचालन की बदली व्यवस्था

Mon, 07 Oct 2013 01:19 AM IST
शैलेंद्र श्रीवास्तव/लखनऊ
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शहरों में लोगों को बेहतर सिटी ट्रांसपोर्ट सेवा उपलब्ध कराने और विभागों के बीच समन्वय बनाने के लिए नगर विकास विभाग अब नोडल एजेंसी बना दिया गया है।
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राज्य सरकार ने आवास और परिवहन विभाग से यह जिम्मेदारी वापस ले ली है। नगर विकास विभाग यह देखेगा कि किस शहर में कितनी सिटी बसें चलाई जानी हैं। बसें फायदे में चल रही हैं या नहीं।

इनके संचालन में किसी तरह की दिक्कत तो नहीं आ रही है। मुख्य सचिव जावेद उस्मानी ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है।

जवाहर लाल नेहरू शहरी नवीनीकरण मिशन (जेएनएनयूआरएम) योजना के तहत महानगरों में सिटी बसें चलाई जा रही हैं।

मौजूदा समय प्रदेश के सात शहरों आगरा, इलाहाबाद, कानपुर, लखनऊ, मेरठ, वाराणसी व मथुरा में 1140 बसें चलाई जा रही हैं। इसके अलावा गाजियाबाद, बरेली, अलीगढ़, गोरखपुर, मुरादाबाद, झांसी, सहारनपुर, इटावा और रामपुर में करीब 1500 बसें और चलाई जानी हैं।
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बसों के चलाने और विभागों के बीच समन्वय बनाने के लिए पहले परिवहन व आवास विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया था, लेकिन बसों के संचालन में दिक्कतें आ रही थीं।

यही नहीं केंद्र सरकार का भी स्पष्ट निर्देश है कि जेएनएनयूआरएम योजनाओं के बेहतर संचालन के लिए निकायों को आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। इसके आधार पर यह निर्णय किया गया है।

इसके मुताबिक नगरीय परिवहन व्यवस्था के संबंध में अंतर्विभागीय समन्वय का काम नगर विकास विभाग करेगा। भूमि उपयोग व नियोजन की जिम्मेदारी भी अब इसी विभाग की होगी।

मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम, मेट्रो, मोनोरेल आदि परियोजनाओं के संबंध में राज्य, राष्ट्रीय या फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली कार्यशालाओं व प्रशिक्षण के लिए अधिकारियों को भेजने की जिम्मेदारी इसी विभाग की होगी।
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नगरीय परिवहन से संबंधित विषयों पर केंद्र सरकार के स्तर पर होने वाली बैठकों में नगर विकास विभाग शामिल होगा। नगर विकास विभाग के अधीन गठित परिवहन निदेशालय में अधिकारी और कर्मचारी प्रतिनियुक्ति पर तैनात किए जाएंगे।

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