1. परीक्षा बहुविकल्पीय होगी।
2.. पहले से कट ऑफ निर्धारित नहीं।
3.उत्तर पुस्तिका नहीं, ओएमआर शीट पर होगी परीक्षा।
बीएड वाले भी दे सकेंगे परीक्षा
अपर मुख्य सचिव प्रभात कुमार ने बताया कि भर्ती परीक्षा में बीएड डिग्री प्राप्त अभ्यर्थी भी शामिल हो सकेंगे, लेकिन परीक्षा में केवल प्राथमिक टीईटी (कक्षा 1 से 5) उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थी ही शामिल हो सकेंगे।
मई में हुई 68,500 सहायक अध्यापकों की भर्ती परीक्षा में सामान्य, ओबीसी, एससी और एसटी की कट ऑफ पहले ही तय हो गई थी। परीक्षा लिखित हुई थी और कई परीक्षार्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं बदलने का मामला सामने आया था। इसे लेकर हुए विवाद को देखते हुए इस बार ये नए बदलाव किए गए हैं।
ऐसी-ऐसी गड़बड़ियां आई थीं सामने
- पिछली परीक्षा में जौनपुर में 16 ऐसे अभ्यर्थी सफल हो गए जिन्होंने परीक्षा तक नहीं दी।
- 2, 5,19 अंक पाने वाले 53 अभ्यर्थी भी सफल घोषित कर दिए गए।
- 51 ऐसे अभ्यर्थी सामने आए जिन्हें उत्तर पुस्तिका में अधिक अंक मिले, लेकिन परिणाम में फेल कर दिए गए।
- सरकार ने अनियमितता की जांच के लिए कमेटी बनाई तो इलाहाबाद स्थित परीक्षा नियामक प्राधिकारी दफ्तर में अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं तक जला दी गईं। इनमें सोनिका देवी की भी कॉपी थी।
पहली बड़ी भर्ती में किरकिरी के बाद इस भर्ती परीक्षा को बिना विवाद सम्पन्न कराना प्रदेश सरकार और बेसिक शिक्षा विभाग के लिए बड़ा इम्तिहान होगा।
27 मई, 2018 को हुई 68,500 शिक्षकों की भर्ती शुरू से ही विवादों में रही। कट ऑफ में बदलाव का मामला हाईकोर्ट पहुंचा। फिर उत्तर पुस्तिकाओं की जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। कई परीक्षार्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं तक बदल दी गईं। सरकार को जांच के लिए 3 वरिष्ठ अधिकारियों की कमेटी बनानी पड़ी। कमेटी की रिपोर्ट के बाद पुनर्मूल्यांकन का अवसर भी दिया गया, लेकिन असंतुष्ट अभ्यर्थी हाईकोर्ट पहुंच गए। कोर्ट ने इसकी सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं।
- विज्ञापन जारी होने से परिणाम तक 49 दिनों में परीक्षा को सफलतापूवर्क संपन्न कराना।
- 18 नवंबर को हुई टीईटी में सामने आए नकल माफिया से भी सावधान रहना होगा।
- लोकसभा चुनाव से पहले बिना विवाद पूरी परीक्षा संपन्न कराना।