इसके अलावा भी अन्य पिछड़ी जातियों को केंद्र से लेकर प्रदेश के मंत्रिमंडल में और भाजपा के संगठन में भागीदारी दी गई है। माना जा रहा है कि यूपी में कुर्मी वोट साधने के लिए नीतीश फैक्टर भले ही उतना कारगर साबित न हो, लेकिन विपक्ष की पीडीए की गणित को बिगाड़ने में नीतीश का नाम कारगर साबित होगा।
सपा और कांग्रेस पर हमलावर होगा राजग
नीतीश की राजग में वापसी करके भाजपा ने सपा के पीडीए पर जहां हमला बोलने के लिए एक मुखर वक्ता खड़ा कर दिया है, वहीं इंडिया गठबंधन पर भी तीखे हमले करने वाले दिग्गज नेता का इंतजाम कर लिया है।
नीतीश के साथियों में सबसे कद्दावर वक्जा केसी त्यागी ने जिस तरह नीतीश को इंडिया का संयोजक न बनने देने के लिए कांग्रेस पर निशाना साधा है, वह यह बताने के लिए पर्याप्त है कि चुनाव के दौरान भाजपा के बजाय नीतीश खेमे से ही कांग्रेस को पिछड़ा विरोधी साबित करने के लिए आरोपों की बौछार होगी।