चंद्रशेखर की सक्रियता की बानगी कई बार मिल चुकी है। वह चाहे 2017 में सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में एससी-ठाकुरों का संघर्ष हो या अन्य घटनाएं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर पहले भी बड़े प्रदर्शन कर चुके चंद्रशेखर के आह्वान पर हाथरस घटना के दोषियों पर कार्रवाई को लेकर बीते शुक्रवार को दिल्ली में हुए प्रदर्शन में उमड़ी भीड़ ने उनकी सियासी हैसियत में और इजाफा किया है। प्रदर्शन में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, जानी-मानी नेता वृंदा करात, डी राजा जैसे नेताओं का शामिल होना यह बताने को पर्याप्त है कि बड़े राजनीतिक चेहरे उनमें सियासी संभावनाएं देख रहे हैं।
चंद्रशेखर ने 2015 में भीम आर्मी बनाकर एससी युवाओं को लामबंद करना शुरू किया था। धीरे-धीरे वे अनुसूचित जाति की सियासी आकांक्षाओं का प्रतीक बनने लगे। उनकी एससी वोटों को लामबंद कर मायावती का विकल्प बनने की इच्छा का प्रमाण इसी से मिलता है कि उन्होंने इसी वर्ष 15 मार्च को बसपा के संस्थापक कांशीराम की जयंती पर बीएसपी से मिलते-जुलते नाम वाली आजाद समाज पार्टी (एएसपी) का गठन किया है जिसका झंडा भी बसपा की तरह नीला है।