फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपी विस चुनाव की घोषणा को चुनौती : दो लोगों ने हाईकोर्ट में दायर की पीआईएल, कहा- कोरोना की रफ्तार के बीच चुनाव उचित नहीं

Wed, 12 Jan 2022 10:03 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ

सार

दो स्थानीय याचियों अतुल कुमार व पंकज शर्मा ने वकील अशोक पांडेय के जरिए बुधवार को जनहित याचिका दायर कर सवाल उठाया है कि जब मौजूदा विधान सभा का कार्यकाल 14 मई तक है तब क्यों चुनाव आयोग ने ऐसे समय चुनाव कराने का निर्णय लिया जब कोरोना वायरस का प्रभाव काफी अधिक है।
विज्ञापन
हाईकोर्ट
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कोरोना की बढ़ती रफ्तार के बीच हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में एक जनहित याचिका दायर कर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की चुनाव तिथियों की घोषणा को चुनौती दी गई है। इसका आधार यह है कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 15(1) में यह प्रावधान है कि विधानसभा चुनाव, विधानसभा भंग होने या विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने पर कराए जाएंगे। इसी धारा में यह भी कहा गया है कि विशेष परिस्थितियों में चुनाव आयोग को यह अधिकार होगा कि वह विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने के छ: महीने के भीतर चुनाव करा सकता है।

विज्ञापन


दो स्थानीय याचियों अतुल कुमार व पंकज शर्मा ने वकील अशोक पांडेय के जरिए बुधवार को जनहित याचिका दायर कर सवाल उठाया है कि जब मौजूदा विधान सभा का कार्यकाल 14 मई तक है तब क्यों चुनाव आयोग ने ऐसे समय चुनाव कराने का निर्णय लिया जब कोरोना वायरस का प्रभाव काफी अधिक है। हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक में वर्चुअल मोड से मुकदमे सुने जा रहे हैं। कोरोना वायरस का विस्तार रोकने के लिए रात्रि कर्फ्यू लगा हुआ है। पंचायत चुनाव में हमारे सैकड़ों कर्मचारियों की मृत्यु हो चुकी है। जाड़ों का मौसम, रात्रि में कुहासा चरम पर होने के कारण रास्ता नहीं दिखता। दिन में देर तक कोहरा छाया रहता है तो ऐसी स्थिति में विधानसभा का चुनाव, कार्यकाल  समाप्त होने के दो महीने पहले कराना अनुचित और असंवैधानिक है।

याचिका में यह भी कहा कि चुनाव आयोग को विशेष परिस्थितियों में कार्यकाल समाप्त होने के पूर्व चुनाव कराने का तो अधिकार है लेकिन उसे विधानसभा के मौजूदा कार्यकाल को समाप्त करने का अधिकार नहीं है। मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद ही जब नई विधानसभा का गठन होना है तो कार्यकाल समाप्त होने के दो माह पूर्व चुनाव कराने का कोई तुक नहीं है। कहा कि कानून में यह व्यवस्था करके चुनाव आयोग को यह अधिकार दिया गया था कि वह इसे ध्यान में रखते हुए विधानसभा चुनाव विधानसभा भंग हुए बिना या विधानसभा का कार्यकाल समाप्त हुए बिना करा सकता है। 
विज्ञापन


संविधान में यह भी व्यवस्था है कि विधानसभा के दो सत्रों के बीच में छह महीने से ज्यादा का अंतर नहीं होना चाहिेए और इसलिए जब मौजूदा विधान सभा की अंतिम बैठक 19 दिसंबर को हुई थी तो राज्य की नई विधानसभा की बैठक 18 जून तक हो जाए। इतनी ही कानून की मंशा है और जून तक विधानसभा का चुनाव तब भी हो सकता है जब मई में चुनाव अधिसूचना जारी हो।

जहां तक अन्य राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव का प्रश्न हैए उसके बारे याचिका में कहा गया है कि उन चारों विधानसभाओं का कार्यकाल मार्च में समाप्त हो रहा है इसलिए वहां पर तो चुनाव कराने में कोई बुराई नहीं है। लेकिन उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव अभी कराना गलत है और इस कारण उस पर रोक लगाई जाए और चुनाव आयोग को यह आदेश दिया जाए कि वह चुनाव अप्रैल व  मई में सम्पन्न कराए।

विधानसभा चुनाव के विरोध में सुप्रीम कोर्ट जाएगा लोकदल 
लोकदल पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगा। यह जानकारी पार्टी अध्यक्ष सुनील सिंह ने बुधवार को पार्टी कार्यालय में मीडियाकर्मियों से दी। उन्होंने कहा कि पिछले 24 घंटे में यूपी में कोरोना के 11,089 नए केस मिले हैं। यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। वहीं, देश में संक्रमण दर बढ़कर छह प्रतिशत हो गया है। देश के कई हिस्सों में कोरोना का सामुदायिक प्रसार शुरू हो चुका है।

चिकित्सा विशेषज्ञ लगातार ओमिक्रॉन की सुनामी आने की चेतावनी दे रहे हैं । ऐसे में चुनाव होने से कोरोना संक्रमण में और इजाफा हो सकता है। पिछले चुनाव में इसका खामियाजा पश्चिम बंगाल को चुकाना पड़ा था। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने पहले ही कहा है कि संभव हो सके तो फरवरी में होने वाले चुनाव को एक-दो माह के लिए टाल दें। क्योंकि जीवन रहेगा तो चुनावी रैलियां और सभाएं होती रहेंगी। कोरोना की वजह से दुनिया भर में चुनाव टले हैं, पर यहां चुनाव कराए जा रहे हैं। लिहाजा चुनाव आयोग को चुनाव के फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें