आपके घर में जल रही दूधिया लाइट आपको समय से पहले बूढ़ा बना रही है। इसकी वजह ‘ब्लू हजार्ड’ के नाम पर बना खतरा है। यह खतरा सीएफएल और दूधिया रोशनी के लिए लगी ट्यूबलाइट से पैदा हुआ है।
विज्ञान भवन, यूपीसीएसटी में शुक्रवार को आयोजित सीवी रमन दिवस पर आयोजित पॉपुलर साइंस लेक्चर में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के जेके इंस्टीट्यूट (इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट) के विभागध्यक्ष प्रो. सीके द्विवेदी ने इस खतरे के प्रति आगाह किया।
उनका कहना था कि सफे द रोशनी वाले उपकरण गहरे नीले रंग का प्रकाश उत्सर्जित करते हैं। लगातार आंखों पर नीले रंग का प्रभाव मस्तिष्क की पीनल ग्रंथि से पैदा होने वाली मेलाटोनिन एंटी ऑक्सीडेंट के उत्सर्जन को कम करता है।
इससे याददाश्त कम होना, जल्दी बूढ़ा होने और जैविक घड़ी के अव्यवस्थित होने का खतरा पैदा हो जाता है। प्रो. द्विवेदी ने कहा कि इसकी जगह अगर हल्का पीलापन लिए एलईडी लाइट का इस्तेमाल किया जाए तो ‘ब्लू हजार्ड’ के खतरे को टाला जा सकता है।
इससे दिमाग को दुरुस्त रखने के साथ बिजली की काफी हद तक बचत की जा सकती है। इसकी वजह सामान्य बल्ब की दक्षता 1-1.5 प्रतिशत, सीएफएल व ट्यूबलाइट की दक्षता 5-8 प्रतिशत ही होना है।
वहीं एलईडी लाइट की दक्षता 10-30 प्रतिशत है। इससे कम बिजली में ज्यादा रोशनी मिलती है। कार्यक्रम में मौजूद प्रमुख सचिव डॉ. हरशरण दास ने बच्चों को सवाल पूछने का सुझाव दिया।