यह यूट्रस के निचले हिस्से को प्रभावित करता है। गर्भाशय ग्रीवा के क्षेत्र में जहां एक सेल दूसरे प्रकार की सेल में परिवर्तित होती है, उसे प्रभावित करता है। वहां कैंसर होने लगता है। सर्वाइकल कैंसर ज्यादातर मानव पैपीलोमा वायरस (एचपीवी) के कारण होता है। यह संक्रमण यौन संपर्क या त्वचा संपर्क से फैलता है।
लक्षण : योनि से असामान्य रूप से खून बहना, रजोनिवृत्ति या योनि संपर्क के बाद रक्तस्राव होना। मासिक धर्म होने के कुछ दिन बाद फिर से रक्तस्राव होना। लगना शामिल हैं।
इलाज : सर्वाइकल कैंसर का टीकाकरण भी होता है। गर्भाशय व ग्रीवा में संक्रमण के तत्काल बाद इलाज शुरू हो जाए तो कैंसर बनने से रोका जा सकता है। कैंसर की पुष्टि होने पर सर्जरी, विकिरण, कीमोथेरेपी या तीनों को मिलाकर भी इलाज की जरूरत पड़ती है।