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सोनिया की रायबरेली पर मोदी सरकार लेगी फैसला

Sat, 01 Aug 2015 02:51 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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स्मार्ट सिटी चुनने के लिए हफ्तों चली माथापच्ची के बाद भी 13वें शहर को लेकर मामला फंस गया है। यूपी के 12 शहरों को अंकों के आधार पर तो साफ तौर पर स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने के लिए चयन कर लिया गया है, लेकिन 13वें शहर को लेकर रायबरेली और मेरठ के बीच पेंच फंसा हुआ है। इन दोनों शहरों को 75-75 अंक मिले हैं।
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कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी का संसदीय क्षेत्र होने के चलते रायबरेली ए और मेरठ को बी श्रेणी में रखते हुए केंद्र के शहरी विकास मंत्रालय को प्रस्ताव भेज दिया गया है। मेरठ में भाजपा का मेयर है और केंद्र में भाजपा की सरकार है। गेंद अब केंद्र के पाले में है और वही तय करेगा कि कौन से शहर को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किया जाए।

केंद्र सरकार शहरों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करना चाहती है, जिससे लोगों को किसी तरह की असुविधा न हो। इसके लिए स्मार्ट सिटी परियोजना शुरू की गई है। इस योजना के लिए यूपी के 13 शहरों को शामिल किया जाना है। स्मार्ट सिटी में सही शहर आएंगे जो केंद्रीय मानक पर खरे उतरेंगे।
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यूपी में हफ्तों चली स्मार्ट सिटी चुनने की मशक्कत

यूपी में स्मार्ट सिटी के लिए शहरों को चयनित करने के लिए हफ्तों मशक्कत चली। इसमें केंद्रीय से निर्धारित मानक को परखा गया। कुछ शहरों को अपने हिसाब से ऊपर नीचे किया गया। यूपी के नगर विकास मंत्री आजम खां का क्षेत्र होने के चलते रामपुर को भी इस योजना में शामिल करने के लिए उसे 78.13 अंक तक पहुंचाया गया। मगर मेरठ और रायबरेली शहर रामपुर से पिछड़ गए।

इन दोनों शहरों को जब एक समान अंक मिले तो बीच का रास्ता निकाला गया। कुल 24 शहरों की तैयार की गई सूची में वरीयता क्रम में मेरठ 13वें और रायबरेली 14वें नवंबर था। इसलिए केंद्र को अगर यह सूची भेजी जाती तो, सीधे तौर पर मेरठ का चयन हो जाता।

इसलिए रायबरेली को ए और मेरठ को बी श्रेणी में रख दिया गया। अब गेंद केंद्र के पाले में है। अंतिम निर्णय केंद्र को करना है। केंद्र चाहे तो यूपी से भेजी गई सूची में उलटफेर भी कर सकता है।

वजह, केंद्र सरकार स्मार्ट सिटी के लिए शहरों को अंतिम रूप देने से पहले अंतर्राष्ट्रीय स्तर की एजेंसी ब्लूमवर्क से इसकी जांच कराएगी।
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