हमारी मेट्रो परियोजना के लिए बृहस्पतिवार बड़ा दिन साबित हुआ। केंद्र सरकार के पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड (पीआईबी) ने लखनऊ मेट्रो प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी। पीआईबी की मंजूरी के बाद मेट्रो प्रोजेक्ट को न सिर्फ केंद्र से वित्तीय मदद मिल सकेगी बल्कि विदेश से लोन मिलने का रास्ता भी साफ हो गया है।
दिल्ली में हुई बैठक में पीआईबी के सदस्यों ने माना कि लखनऊ मेट्रो की प्रगति देश में सबसे तेज और दूसरी परियोजनाओं के मुकाबले कहीं बेहतर है। पीबीआई मंजूरी के बाद दिसंबर 2016 में मेट्रो का ट्रायल रन शुरू करने की उम्मीदों को और बल मिला है।
वित्त मंत्रालय में पीआईबी अफसरों के साथ बैठक में एलएमआरसी के एमडी कुमार केशव ने प्रोजेक्ट की प्रगति पर प्रेजेंटेशन दिया। इस पर सभी सदस्यों ने सहमति जताई। बैठक में मौजूद रहे मुख्य सचिव आलोक रंजन ने इसे पीआईबी मंजूरी को यूपी के लिए बड़ी उपलब्धि बताई।
फायदा : अब नहीं होगी फंड की कमी
पहले चरण में ट्रांसपोर्ट नगर से चारबाग तक 8.5 किमी मेट्रो का संचालन होना है। इस पर कुल 2000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। वहीं, पूरे नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर का बजट 6800 करोड़ रुपये है। इसमें से केंद्र व राज्य को 1350-1350 करोड़ रुपये देने हैं। बाकी के 4100 करोड़ रुपये विदेशी ऋण से जुटाने हैं। फिलहाल राज्य सरकार अपने कोष से इस प्रोजेक्ट पर काम कर रही थी। पीआईबी की मुहर के बाद केंद्र और विदेशी ऋण मिलने से काम में और तेजी आ जाएगी।