पासवान ने इससे पहले भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बाद में पत्रकारों को बताया कि उप्र में गन्ना किसानों की समस्या बड़ी है। पूरे देश में गन्ना किसानों का 19 हजार करोड़ रुपये बकाया है।
राज्य सरकारों की जवाबदेही है कि वह भुगतान कराए। पासवान ने बताया कि मिल मालिकों के अनुसार चीनी की प्रोडक्शन कास्ट 32 से 33 रुपये प्रति किलो आती है। यहां चीनी का दाम 26 से 28 रुपये प्रति किलो है। जबकि अंतरराष्ट्रीय मार्केट में 22 से 24 रुपये है। ऐसे में चीनी का निर्यात करने पर भी नुकसान ही है। ऐसे में किसानों को पैसे कहां से दिए जाएं?
मंत्री समूह की बैठक में निर्णय हुआ कि चीनी मिलों को सहायता राशि के रूप में प्रति क्विंटल गन्ने पर साढ़े पांच रुपये सरकार देगी। साथ ही 20 लाख टन चीनी का निर्यात करने का भी फैसला किया गया है।