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कोरोना से मरने वाले व्यक्ति को गले न लगाएं, केंद्र सरकार ने अंतिम संस्कार के लिए जारी की गाइडलाइन

Sat, 04 Apr 2020 08:44 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
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corona virus - फोटो : amar ujala
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कोरोना से मरीज की मौत के बाद घर वालों संग डॉक्टर व स्टाफ को सावधानी बरतनी होगी। क्योंकि जरा सी लापरवाही घातक हो सकती है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना से मौत के बाद पोस्टमार्टम से लेकर दाह संस्कार तक के लिए नई गाइड लाइन तय की है। 
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इसका सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। आम लोगों को सख्त निर्देश हैं कि वह शव के चेहरे के अलावा कोई भाग नहीं देख सकते। यही नहीं शव को नहलाने, गले लगाने व चूमने पर भी पाबंदी है। 

सीएमओ डॉ. नरेंद्र अग्रवाल का कहना है कि कोरोना खांसते या छींकते समय ज्यादा फैलता है। ऐसे में स्वास्थ्य कर्मचारी ग्लव्स, मॉस्क, चश्मा व किट पहनकर ही मृत शरीर को छुएं। 
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शव को कीटाणु सहित लीक न होने वाले बैग या लिनन में ही रखें। कैथेटर, ट्यूब, ड्रेनेज, कैनुला आदि चिकित्सीय उपकरणों को एक फीसदी हाइपोक्लोराइट से विसंक्रमित करना और सुरक्षित रखना या डिस्पोज करना है। 
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मृत शरीर के तरल रिसाव वाले छिद्र जैसे नाक, मुंह, कान आदि को सबसे पहले बंद कर देना है। अस्पताल की चादर, गद्दा आदि को सुरक्षित रखकर साफ  कराना या डिस्पोज करना होगा। 

शव को चार डिग्री तापमान पर सुरक्षित तरीके से फ्रिज में रखना होगा। शवदाह के दौरान अधिक भीड़ नहीं होनी चाहिए। शवदाह करने वाले कर्मचारियों को कोई विशेष खतरा नहीं है। 

शवदाह के बाद राख लेने में भी कोई दिक्कत नहीं है। श्मशान गृह के सभी कर्मचारियों, यात्रा में शामिल लोगों को मुंह ढककर और हाथ की स्वच्छता पर सावधानी बरतनी होगी।

गाइड लाइन में यह भी 
- अस्पताल में कोरोना मरीज के बेड की चादर को ठीक तरह से गड्ढे में डिस्पोज किया जाए। 
- शव पर किसी प्रकार का लेप नहीं लगाना है। पीपीई किट पहनकर पोस्टमार्टम करें।
- पोस्टमार्टम के समय प्रयोग हुए उपकरणों व औजारों को सही से विसंक्रमित करें। 
 - शव को परिवारीजनों को सौंपने पर खुले हिस्से को सोडियम हाइपोक्लोराइट लगाएं।
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