बेहतर हवाई सेवाएं देने के लिए हवाई पट्टियों को विकसित करने के वादे से मुकरने के चलते राज्य सरकार के 182 करोड़ रुपये डूबते नजर आ रहे हैं। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया मेरठ, मुरादाबाद और फैजाबाद में नागरिक हवाई अड्डों को विकसित करने के अपने वादे से पीछे हट गई है।
उसने तीनों ही जगह एयरपोर्ट बनाने को घाटे का सौदा बताया है। इसके चलते 182 करोड़ की वह जमीन भी फंस गई है, जो हवाई पट्टी के विस्तारीकरण के लिए तीनों जिलों में खरीदी गई है। एयरपोर्ट के आसपास की यह जमीन अन्य किसी उपयोग में भी नहीं लाई जा सकती है।
वर्ष 2013 में एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने फैजाबाद, मेरठ व मुरादाबाद में राजकीय हवाई पट्टियों को नागरिक हवाई अड्डे के रूप में विकसित किए जाने के लिए इन्हें अथॉरिटी को हैंडओवर करने का प्रस्ताव दिया था।
प्रस्ताव पर सहमति जताते हुए प्रदेश सरकार ने अथॉरिटी के साथ 22 फरवरी 2014 को एमओयू भी कर लिया। इसमें तय हुआ था कि परियोजनाओं के लिए जरूरी जमीन राज्य सरकार निशुल्क देगी। जुलाई 2014 में ये तीनों हवाई पट्टियां अथॉरिटी को हस्तांतरित भी कर दी गईं।
इसके अलावा विस्तारीकरण के लिए मेरठ में 392 एकड़, मुरादाबाद में 304 एकड़ और फैजाबाद में 251 एकड़ भूमि चिह्नित की गई, जिसे खरीदने के लिए 14 अरब 47 करोड़ रुपये का एस्टीमेट तय हुआ। मेरठ में 29.91 करोड़, मुरादाबाद में 92.31 करोड़ और फैजाबाद में 60.33 करोड़ की जमीन खरीद भी ली गई।
इस बीच पिछले माह अथॉरिटी की ओर से इन तीनों ही परियोजनाओं का इनवेस्टमेंट रिटर्न रेशियो (आईआरआर) निगेटिव बता दिया गया। यानि इन स्थानों पर हवाई अड्डे बनाने से अथॉरिटी को उसके निवेश के हिसाब से आय नहीं होगी।
चार जिलों के हवाई अड्डे होंगे टेकअप
ऐसे में नागर विमानन मंत्रालय से अनुमोदन प्राप्त करने के बाद ही एयरपोर्ट अथॉरिटी आगे की कार्रवाई कर सकेगी। इस जानकारी से प्रदेश का उड्डयन विभाग सकते में आ गया, क्योंकि 182 करोड़ की जमीन तीनों स्थानों पर खरीदी जा चुकी थी।
एयरपोर्ट अथॉरिटी ने आगरा, इलाहाबाद, कानपुर नगर और बरेली में वायुसेना के हवाई अड्डों में नए सिविल एनक्लेव बनाने संबंधी परियोजनाओं को टेकअप करने की सहमति जताई है।
इन चारों एयरपोर्ट में नए सिविल एनक्लेव बनाने के लिए भी अथॉरिटी के साथ करार किया गया था। गौरतलब है कि कानपुर नगर में 66.86 करोड़ से 50 एकड़, बरेली में 53.10 करोड़ से 25 एकड़, आगरा में 153.28 करोड़ से 57 एकड़ और इलाहाबाद में 289.21 करोड़ रुपये से 50 एकड़ जमीन खरीदी जानी है। इसका बड़ा हिस्सा खरीदा भी जा चुका है।
सूबे के इन सभी सात जिलों में उन्नत हवाई सेवाओं के लिए बीस अरब रुपये से जमीन खरीदी जानी थी। इसमें से अभी लगभग एक चौथाई पैसा ही खर्च हुआ है, जिसमें बरेली, कानपुर नगर, इलाहाबाद और आगरा की परियोजनाएं शामिल हैं।
वहीं मुरादाबाद, फैजाबाद और मेरठ में 14 अरब 47 करोड़ खर्च होने थे। गनीमत है कि इन तीनों जिलों में 182 करोड़ की ही जमीन खरीदी गई, अन्यथा नुकसान कहीं ज्यादा हो सकता था।