केंद्र सरकार ने 105 किलोमीटर लंबे 4 लेन आउटर रिंग रोड को हरी झंडी देकर राजधानी को नए साल का तोहफा दिया है। इसे भारत के राजपत्र में प्रकाशित भी कर दिया गया है। इसके लिए लखनऊ और बाराबंकी के 43 गांवों में जमीन ली जाएगी।
इसमें 26 गांव लखनऊ के और बाराबंकी के देवां, नवाबगंज तहसील के हैं। दोनों जिलों से करीब 1500 एकड़ भूमि सड़क के लिए ली जाएगी। लगभग 3500 करोड़ रुपये केंद्र सरकार इस सड़क पर खर्च करेगी। जबकि इसका लगभग 10 फीसदी राज्य सरकार को खर्च करना पड़ेगा।
केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह की ओर से उनके प्रतिनिधि सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी दिवाकर त्रिपाठी ने ये घोषणा बृहस्पतिवार शाम की। आउटर रिंग रोड का खाका लखनऊ विकास प्राधिकरण ने करीब पांच महीने पहले ही फाइनल कर दिया था। एनएचआई ने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) की अधिसूचना भी प्रकाशित कर दी है।
साथ ही अपने एक डिप्टी मैनेजर को नोडल अफसर भी बना दिया है। एपीआई अंसल की हाइटेक टाउनशिप के बीच से आउटर रिंग रोड निकलेगा। इससे इसका विस्तारित क्षेत्र दो हिस्सों में बंट जाएगा।
197 गांवों के विस्तारित क्षेत्र को छूते हुए बख्शी का तालाब से लेकर पूरे लखनऊ को चारों ओर से घेरते हुए रिंग रोड कानपुर रोड तक जाएगी। इसमें न केवल एलडीए और आवास विकास बल्कि कानपुर रोड पर लीडा क्षेत्र के गांव भी शामिल होंगे। इस रिंग रोड को राजधानी में 2031 तक की जरूरतों के हिसाब से बनाया जाएगा। जिससे शहर के भीतर यातायात का दबाव कम हो सके।
ऐसी बनेगी लाइफ रिंग
इसकी शुरुआत बख्शी का तालाब के आगे डिगोई गांव से होगी। बीकेटी ब्लॉक से अगला पड़ाव कुर्सी रोड पर गांव बेहटा को छुएगा। इसके आगे बाराबंकी के निंदूरा के गांवों को छूते हुए देवां क्षेत्र को छुएगा।
गांव जबरीखुर्द, कटालीपुरवा, गोसाईंगपुरवा, सरसौंधी, मुरादाबाद, मुजफ्फरमऊ और डु़मरीपुरवा गांव को टच करेगा। इसके बाद में दोबारा आउटर रिंग रोड लखनऊ में प्रवेश करेगा। इसके बाद में इंदिरा कैनाल के पास गोयल हाइट्स अपार्टमेंट के पास से आउटर रिंग रोड निकलेगा। इसके आगे इंदिरा कैनाल के एक्वाडक्ट को टच करेगा।
सुल्तानपुर रोड पर एपीआई अंसल की हाइटेक टाउनशिप से गुजरेगा। यहां गांव मधरमऊ कलां को रिंग रोड काटेगा। इसी एलाइनमेंट पर आगे बढ़ते हुए नगराम के गांव दाऊद नगर से आउटर रिंग रोड गुजरेगा।
आगे रायबरेली रोड के गांव कल्ली पश्चिम के पास से रिंग रोड छुएगा। यहां से कानपुर रोड पर लीडा क्षेत्र में अगला पड़ाव होगा। इसके आगे मोहान रोड का गांव फतेहगंज आउटर रिंग रोड का हिस्सा होगा।
फिर हरदोई रोड का गांव अमेठी सलेमपुर इस हाईवे को छुएगा। आगे गोमती पार करते हुए हाईवे को गांव कंकड़ाबाद मिलेगा। इसके आगे फिर से ये सड़क सीधे बख्शी का तालाब से मिल कर एक पूरा रिंग बना लेगी।
बाराबंकी की बदलेगी किस्मत
लखनऊ महायोजना 2031 के तहत एलडीए के विकास क्षेत्र का हिस्सा बनाए गए नौ ब्लॉकों को कवर करते हुए बनने वाली इस रिंग रोड के निर्माण में करीब चार हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। प्रोजेक्ट का खर्च केंद्र व प्रदेश सरकार उठाएगी। इसका फायदा बाराबंकी के देवां, बंकी और निंदुरा ब्लॉक के 43 गांवों के साथ ही 205 गांवों को मिलेगा। आउटर रिंग रोड का काम एनएचएआई, एलडीए और पीडब्लूडी मिलकर करेंगे।
केंद्र सरकार ने लखनऊ को एक बहुत बड़ी खुशखबरी नए साल के मौके पर दी है। आउटर रिंग रोड को अधिसूचित कर दिया गया है। इस पर लगभग 3500 करोड़ रुपये केंद्र सरकार खर्च करेगी। बाकी करीब 10 फीसदी राज्य सरकार को वहन करना पड़ेगा। जल्द ही अर्जन की प्रक्रिया शुरू होगी। लखनऊ और बाराबंकी के गांवों की 1500 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा।
दिवाकर त्रिपाठी, प्रतिनिधि, केंद्रीय गृहमंत्री और सांसद राजनाथ सिंह