1981 बैच के कानपुर के आईआईटियंस ने गुरुवार को कैंपस में पुरानी यादें ताजा कीं। कहा कि हम अपने घर से डिब्बे में घी लाते थे और चोरी-छिपे मेस में ले जाकर खाते थे। डिब्बे में घी देखते ही साथी टूट पड़ते और पूरा घी चट कर जाते थे।
अब तो रोटी में घी लगाकर दी जा रही है। यानी खाने की गुणवत्ता आईआईटी ने सुधारी है। खाना अब घर जैसा है। कुछ बोले, अब आईआईटी की पढ़ाई महंगी हो गई है।
हमारे जमाने में एडमिशन की प्रॉब्लम होती थी। फीस कम थी मेस भी 150 रुपये महीने में निपट जाता था। एलमनाइ मीट का उद्घाटन निदेशक प्रो. इंद्रनील मन्ना ने किया। फिर कई पुरातन छात्रों को प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
इस बीच पुरानी यादों में खोए तमाम आईआईटियंस भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। इस दौरान आईआईटियंस ने खाने-पीने के साथ कैंपस में सैर-सपाटा भी किया।
एलमनाइ मीट में बैच के करीब 30 स्टूडेंट अपने परिवार के साथ आईआईटी कैंपस पहुंचे थे। पुराने दोस्तों को देख कई गले से लिपट गए। कई ने एक-दूसरे के साथ हंसी-ठिठोली के साथ परिवार के साथ मुलाकात भी की।