मुजफ्फरनगर दंगे को लेकर एक न्यूज चैनल की ओर से किए गए स्टिंग ऑपरेशन की जांच शुरू हो गई है।
इसके लिए बनाई गई विधानसभा की सात सदस्यीय समिति ने सोमवार को स्टिंग से जुड़ी सीडी देखी। यह संपादित थी।
समिति ने चैनल से असंपादित सीडी मांगी है। टीवी चैनल तथा स्टिंग से जुड़े अधिकारी, कर्मचारियों को नोटिस जारी कर 28 नवंबर को तलब किया गया है।
समिति के अध्यक्ष सतीश निगम की अध्यक्षता में सोमवार को हुई बैठक में सबसे पहले स्टिंग ऑपरेशन की सीडी देखी गई। इससे कई चीजें साफ नहीं हुई।
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सदस्यों की राय थी कि असंपादित सीडी मंगाई जाए। इसके लिए चैनल को नोटिस जारी कर उसके प्रतिनिधि को सीडी समेत 28 नवंबर को तलब किया गया है।
उसी दिन समिति की अगली बैठक होगी। जिन पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों, कर्मचारियों का स्टिंग किया गया है, उन्हें भी 28 नवंबर को ही बुलाया गया है।
बैठक में तय हुआ कि स्टिंग ऑपरेशन की सत्यता की जांच के लिए सीडी एवं अन्य दस्तावेजों का बारीकी से परीक्षण किया जाए और सभी पक्षों से साक्ष्य मांगे जाएं।
सभी की राय थी कि जरूरी होने पर उन्हें समिति के समक्ष बुलाकर पूछताछ भी की जाए। समिति जांच के लिए अपनी प्रक्रिया तय करने के लिए स्वतंत्र होगी।
इस पर भी सहमति बनी कि जांच में तेजी लाई जाए ताकि विधानसभा के अगले सत्र में रिपोर्ट को सदन में रखा जा सके।
बैठक में समिति के सदस्य मुरादाबाद से सपा विधायक मो. इरफान, आजमगढ़ से सपा विधायक डॉ. संग्राम यादव व बृज लाल सोनकर, गाजियाबाद से बसपा विधायक अमर पाल शर्मा, मोदीनगर से रालोद विधायक सुदेश शर्मा और बुलंदशहर से कांग्रेस विधायक दिलनवाज खान शामिल हुए।
24 सितंबर को जारी हुई थी अधिसूचना
मुजफ्फरनगर दंगे को लेकर एक खबरिया चैनल के स्टिंग ऑपरेशन में कद्दावर मंत्री आजम खां का नाम आने के बाद विधानसभा में इसकी सत्यता की जांच कराने का प्रस्ताव पारित किया गया था।
विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय ने संसदीय जांच समिति के गठन के लिए सहमति दे दी थी। संसदीय जांच समिति के गठन के लिए 24 सितंबर को अधिसूचना जारी की गई थी।
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इसमें सपा के चार, बसपा, भाजपा व कांग्रेस के एक सदस्य शामिल किए गए थे। भाजपा के मनीष असीजा ने समिति से इस्तीफा दे दिया था। उनकी जगह रालोद के सुदेश शर्मा को शामिल किया गया था।