सीएम ने कहा, पूरे मामले में पुलिस की भूमिका की भी जांच कराई जाएगी। संरक्षण गृह केखिलाफ 30 जुलाई को एफआईआर दर्ज कराई गई थी, फिर भी पुलिस ने समुचित कार्रवाई क्यों नहीं की। इसकी जांच एडीजी, गोरखपुर को करने के आदेश दिए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह भी सामने आया है कि वर्ष 2009 से संचालित इस संस्था को पिछली सरकारों ने बड़ी ही उदारतापूर्वक अनुदान दिया। बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) में भी पिछली सरकार के ही कृपा पात्र लोग शामिल हैं। घटना में उनकी भी संलिप्तता रही होगी। उनकी सरकार चाहती है कि घटना के पीछे जो भी जिम्मेदार हैं, वह दूध और पानी की तरह साफ हो। इसलिए पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई को दी जा रही है।
योगी ने कहा, इस दौरान साक्ष्यों के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ न हो सके, इसलिए एडीजी क्राइम की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया है। इसमें दो महिला अफसरों एसपी ईओडब्ल्यू और एसपी, पुलिस ट्रेनिंग स्कूल, मेरठ को भी रखा गया है। एसटीएफ भी इस कमेटी की मदद करेगी।
सीएम ने कहा कि संरक्षण गृह से मिली बालिकाओं को वाराणसी शिफ्ट कर दिया गया है, जबकि बालकों को भी बाल संरक्षण गृह में शिफ्ट करने के निर्देश दे दिए गए हैं। जो भी बच्चे बरामद हुए हैं, उन्हें शिफ्ट करने की कार्रवाई युद्धस्तर पर की जा रही है। सीएम से यह पूछे जाने पर मामले में मेडिकल रिपोर्ट में क्या आया, सीएम ने कहा कि बालिकाओं के बयान को सरकार ने गंभीरता से लेते हुए सीबीआई को जांच देने का फैसला किया। संस्था की मान्यता रद करने और उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने में समय का बहुत ज्यादा गैप होने के मामले में उन्होंने कहा कि इसके लिए ही जिलाधिकारी को चार्जशीट दी गई है। जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।