जिले में वर्ष 2004 से 2006 में हुए 425 करोड़ के खाद्यान्न घोटाले की जांच सीबीआई ने फिर शुरू कर दी है। खाद्यान्न घोटाले का खुलासा होने पर वर्ष 2005 में प्रदेश शासन के विशेष सचिव ने जांच की थी और 425 करोड़ के घोटाले की रिपोर्ट दी। इसके बाद ईओडब्लू और फिर 2007 में सीबीआई ने जांच शुरू की। मामले में 63 मुकदमे 17 थानों में दर्ज हुए थे। इस मामले में 300 से अधिक लोग अभी तक आरोपित किए जा चुके हैं। बुधवार को जिला आपूर्ति कार्यालय में सीबीआई टीम पहुंची। वहां पर टीम के अधिकारियों ने छपिया व कटरा बाजार के लोगों के बयान दर्ज किए। सीबीआई अधिकारियों ने कहा कि गुरुवार को भी जांच होगी।
काम के बदले अनाज योजना शुरू होने के बाद जिले में संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना में बड़े पैमाने पर घोटाले का मामला वर्ष 2004 में सामने आया। जांच में 425 करोड़ के घोटाले की रिपोर्ट शासन को मिली तो ईओडब्लू ने जांच शुरू की। 63 मामले ऐसे सामने आए जिसमें बिना काम कराए ही फर्जी भुगतान किए गए और अनाज का वितरण दिखाया गया। इसमें थानों में मुकदमे दर्ज हुए और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष समेत कई ब्लॉक प्रमुख और बीडीओ के विरुद्ध मुकदमे दर्ज हुए। गिरफ्तारियां भी हुईं और फिर जांच सीबीआई को मिली। सीबीआई ने भी जांच करके कार्रवाई की।
इसके अलावा उन वर्षों में गरीबों को कोटे के माध्यम से दिए जाने के राशन में भी घोटाले की बात सामने आई। सीबीआई अब राशन वितरण में गड़बड़ी की भी जांच कर रही है। बुधवार को सीबीआई टीम के अफसरों ने कटरा बाजार के कोटेदारों और उनके यहां के लाभार्थियों का बयान लेना शुरू किया है। इसके अलावा छपिया के 15 ग्राम पंचायतों के तत्कालीन प्रधानों को भी बुलाकर पूछतांछ की और उनके बयान दर्ज किया। बताया जा रहा है कि सीबीआई मामलों की जांच पूरी करने में जुटी है और इसके लिए लाभार्थियों से पूछतांछ कर वितरण में हुई गड़बड़ी की जानकारी कर रही है। गुरुवार को भी सीबीआई के अधिकारी मामले में बयान दर्ज करेंगे। आपूर्ति विभाग के क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी भानु प्रताप सिंह सहयोग में रहे और उन्होंने बुलाए गए लोगों को टीम के सामने पेश कराया।
मंडी और कोटेदारों के बैंक खातों की भी पड़ताल
खाद्यान्न घोटाले के समय राशन को दूसरे प्रांतों में बेचने तक का काम हुआ था। इसमें मंडी के कर्मियों और वहां के व्यापारियों की भूमिका पर सवाल खड़े हुए थे। इसके अलावा कोटेदारों की ओर से राशन उठान के लिए बैंकों से ड्राफ्ट भी बनाए जो विभाग में जमा किए। इसकी भी पड़ताल शुरू हुई है, बताया जा रहा है कि घोटाले की शुरुआत इन्हीं सब कार्यों से शुरू होती है। अब सीबीआई हर बिंदु की पड़ताल कर रही है। इलाहाबाद बैंक की मुख्य शाखा और कचहरी शाखा में पहुंचकर जानकारी लिया। मंडी के अभिलेखों की भी जांच होनी है।
डीएसओ वीके महान ने बताया कि खाद्यान्न घोटाले की जांच के लिए सीबीआई टीम आई है और जांच कर रही है। जांच में विभाग पूरा सहयोग दे रहा है। विभाग के अधिकारियों को पूरा सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं।