काली कमाई से धनकुबेर बने नोएडा अथॉरिटी और यमुना एक्सप्रेस-वे के पूर्व चीफ इंजीनियर यादव सिंह मामले की जांच अब सीबीआई करेगी। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बृहस्पतिवार को कहा कि यादव सिंह से संबंधित कथित कंपनियों और छापे में बरामद अकूत संपत्ति प्रकरण की जांच सीबीआई करे।
कोर्ट के इस फैसले से सूबे की पूर्व बसपा सरकार और मौजूदा सपा सरकार में यादव सिंह के करीबी रहे रसूखदार, नौकरशाह और राजनेता भी सीबीआई जांच की जद में आ जाएंगे। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति श्रीनारायण शुक्ल की खंडपीठ ने सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर की पीआईएल पर यह आदेश दिया।
अदालत के सामने नहीं गली राज्य सरकार की दाल
न्यायिक आयोग मामला रफा-दफा करने के लिए : याची
याची के वकील अशोक पांडेय ने दलील दी कि 27 व 28 नवंबर 2014 को यादव सिंह के नोएडा, दिल्ली व गाजियाबाद परिसरों पर आयकर विभाग के छापे में करोड़ों की अवैध संपत्ति के सुबूत मिले।
राज्य सरकार ने मामले में प्राथमिकी दर्ज करवाने के बजाय न्यायिक आयोग बना दिया। ऐसा इसलिए किया गया ताकि सूबे में पूर्व और मौजूदा सरकारों में ऊंची पहुंच रखने वाले यादव सिंह के मामले को रफा-दफा किया जा सके।
मनमाने तरीके से काम
पीआईएल में यह भी आरोप था कि वर्ष 2002 से 2014 के बीच करीब 2,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं से यादव सिंह ने बड़ी तादात में अवैध संपत्ति अर्जित की। यहां तक कि 320 बेशकीमती प्लाट बेचकर 750 करोड़ रुपए अर्जित करने का भी आरोप लगाया गया। याची ने सीबीआई जांच की मांग की।
रिपोर्ट आने दीजिए, हर तरह की कार्रवाई होगी : राज्य सरकार
राज्य सरकार की तरफ से महाधिवक्ता विजय बहादुर सिंह और अपर महाधिवक्ता बुलबुल गोदियाल ने इन आरोपों को बे-बुनियाद, झूठे और मीडिया रिपोर्ट पर आधारित बताकर याचिका का विरोध किया।
कहा कि न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट के बाद सरकार हर तरह की कार्रवाई करेगी। उन्होंने याची की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर कहा कि यह राजनीति से प्रेरित है और महज मीडिया रिपोर्र्टों पर सीबीआई जांच के आदेश नहीं दिए जा सकते। इसलिए याचिका स्वीकार करने योग्य नहीं है।
कोर्ट ने कहा, जांच तो सीबीआई ही करेगी
हाईकोर्ट ने कहा कि हमारे मतानुसार मामले के हालात, इसका संदर्भ सीबीआई के सुपुर्द करने लायक हैं, क्योंकि इसमें भ्रष्टाचार का मामला बनता है... अदालत के समक्ष एसआईटी के हवाले से जो सामग्री आई है, उससे केस की गंभीरता व अहमियत का पता चलता है।