अपने आदेश में अदालत ने कहा है कि परीक्षा कराने वाली संस्था व अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। यह भी आरोप है कि परीक्षा कराने वाले अधिकारियों ने बेसिक शिक्षा विभाग, लखनऊ के कुछ अधिकारियों व अन्य के साथ षड्यंत्र कर परीक्षा में धांधली की।
अदालत ने कहा कि सामने आए तथ्यों व साक्ष्यों के आधार पर बेसिक शिक्षा विभाग व परीक्षा नियामक प्राधिकरण, इलाहाबाद के अनजाने अधिकारियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी, 201, 409, 420, 467, 468, 471 व पीसी एक्ट 1988 के सेक्शन 13 (1) (ए) सपठित 13 (बी) के तहत आरोप बनता है।
शिकायतकर्ताओं ने अदालत में परीक्षा में जारी आंसर शीट की कार्बन कापी व आंसर की भी प्रस्तुत की थी। इसमें साबित हुआ था कि अधिक नंबर पाने वाले कई अभ्यर्थियों का चयन नहीं किया गया जबकि उनसे काफी कम नंबर पाने वालों को उत्तीर्ण घोषित कर दिया गया।
इसके अलावा कई अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिका के पन्ने फाड़ कर दूसरे अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिका में लगा दिए गए थे। यह पाया गया था कि 23 अभ्यर्थी जिन्हें चयनित घोषित कर दिया गया था वह फेल थे।
ठीक इसी तरह दूसरी सूची में लिखित परीक्षा में अनुत्तीर्ण पाए गए 24 अभ्यर्थियों का चयन कर लिया गया। अदालत के सामने परीक्षा में कई और अनियमितताओं का हवाला दिया गया।