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सीबीआई ने चीनी निगम की बेची गई मिलों से जुड़े दस्तावेज मांगे, मायावती सरकार ने निजी हाथों में बेचे

Mon, 01 Jul 2019 05:58 AM IST
Abhishek Singh अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
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सीबीआई - फोटो : Social Media
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मायावती सरकार के दौरान प्रदेश में हुए चीनी मिलों के  निजी हाथों में बेचने में हुए घोटाले को लेकर सीबीआई ने अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। सीबीआई ने उत्तर प्रदेश सहकारी चीनी निगम को पत्र भेज कर इससे जुड़े दस्तावेजों को उपलब्ध कराने को कहा है। इस मामले में सीबीआई ने टेंडर से जुड़े दस्तावेज जिसमें कितने लोगों ने निविदा डाली, किसकी निविदा सबसे कम थी, किस आधार पर निजी हाथों में इन मिलों को बेंचा गया।
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इतना ही नहीं सीबीआई ने इस पूरे सौदे से जुड़े कैबिनेट के निर्णयों की भी जानकारी मांगी है ताकि इस जांच को तह तक पहुंचाया जा सके। सूत्रों का कहना है कि जिन कंपनियों को यह मिलें बेंची गई उनका क्या बैक ग्राउंड रहा है इसकी भी पड़ताल सीबीआई कर रही है।

मालूम हो कि उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम लिमिटेड के अधीन 10 चालू व 11 बंद चीनी मिलों की बिक्री वर्ष 2010-11 में की गई थी। इसमें से देवरिया, बरेली, लक्ष्मीगंज और हरदोई स्थित इकाई खरीदने के लिए दिल्ली की नम्रता मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड कंपनी तथा रामकोला, छितौनी व बाराबंकी इकाई खरीदने के लिए गिरियाशों कंपनी प्राइवेट लिमिटेड ने दावा प्रस्तुत किया था। दोनों कंपनियों के निदेशकों ने वर्ष 2008-09 की बैलेंसशीट लगाई। शासन की तरफ से गठित समिति ने सलाहकारों की संस्तुति के आधार पर दोनों कंपनियों को सभी सातों इकाइयां बेच दीं।
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एसएफआईओ की जांच में दोनों कंपनियां फर्जी पाई गईं थीं। निगम के प्रधान प्रबंधक एसके मेहरा ने नम्रता मार्केटिंग कंपनी के निदेशक व दिल्ली के रोहणी सेक्टर-16 निवासी राकेश शर्मा, गाजियाबाद के इंदिरापुरम में रहने वाले धर्मेंद्र गुप्ता, सहारनपुर साउथ सिटी निवासी सौरभ मुकुंद और सहारनपुर के मिर्जापुर पोल-3 में रहने वाले मो. जावेद तथा गिरियाशों कंपनी के दिल्ली के रोहणी सेक्टर-16 में रहने वाले राकेश शर्मा की पत्नी सुमन शर्मा, गाजियाबाद के इंदिरापुरम निवासी धर्मेंद्र गुप्ता, सहारनपुर के मिर्जापुर निवासी मो. नसीम व मो. वाजिद अली के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में केस दर्ज कराया था।

नम्रता मार्केटिंग कंपनी की ओर से उपलब्ध कराए गए प्रमाणपत्रों में सौरभ मुकुंद और मोहम्मद जावेद तथा गिरियाशों कंपनी की तरफ से दिए गए प्रमाणपत्र में मो. नसीम व मो. वाजिद को निदेशक बताया गया है। प्रमाणपत्रों के साथ ही लगी बैलेंस शीट में दो निदेशकों राकेश शर्मा व डीके गुप्ता के हस्ताक्षर हैं। इसी तरह गिरियाशों कंपनी की बैलेंस शीट में निदेशक डीके गुप्ता व सुमन शर्मा के हस्ताक्षर हैं। जांच के दौरान नम्रता मार्केटिंग कंपनी के निदेशकों ने किसी भी तरह की जानकारी देने से इनकार कर दिया।

उन्होंने गंभीर कपट अन्वेषण विभाग की जांच टीम को बयान दिया कि कंपनियां सिर्फ कागजी हैं और इसमें उनका किसी भी तरह का शेयर नहीं है। उन्होंने किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं किए। जो भी किया वह दोनों कंपनियों के मालिक सुरेश कुमार गुप्ता के कहने पर किया। दोनों कंपनियों के दिल्ली में जो ऑफिस दिखाए गए थे वह निजी मकान निकले थे।
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