नई दिल्ली स्थित सीबीआई मुख्यालय की टीम ने बुधवार को उत्तर रेलवे के डिप्टी चीफ इंजीनियर हरीश कुमार को पांच लाख रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। सीबीआई ने इंजीनियर को रिश्वत देने वाले व्यापारी पिता-पुत्र जौनपुर के कोसीकलां निवासी वीरेंद्र तोमर और प्रशांत तोमर को भी गिरफ्तार किया है। सीबीआई ने आरोपियों के लखनऊ और जौनपुर के ठिकानों पर छापा मारकर 52 लाख रुपये नकद, लॉकर की चाबी, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण व संदिग्ध दस्तावेज आदि बरामद किए हैं।
सीबीआई के प्रवक्ता के मुताबिक उत्तर रेलवे, लखनऊ के लोक सेवकों एवं ठेकेदारों सहित 10 आरोपियों के खिलाफ 7 नवंबर 2023 को केस दर्ज किया गया था। दरअसल, सीबीआई को सूचना मिली थी कि हजरतगंज स्थित उत्तर रेलवे कार्यालय में तैनात अधिकारी कुछ ठेकेदारों के साथ मिलकर टेंडर में फेरबदल करने, बकाया भुगतान कराने आदि कार्यों के बदले रिश्वत का लेन-देन कर रहे हैं। वहीं अधिकारी भी रिश्वत लेकर ठेकेदारों का नियमों के विपरीत भुगतान कर रहे हैं। बाकी ठेकेदारों के साथ कार्य देने और भुगतान में पक्षपात किया जा रहा है।
सीबीआई को पुख्ता सूचना मिली कि जौनपुर के तोमर कंस्ट्रक्शन के मालिक वीरेंद्र तोमर और उनका बेटा प्रशांत तोमर डिप्टी चीफ इंजीनियर हरीश कुमार (आईआरएसई 2006) को पांच लाख रुपये की रिश्वत देने वाले हैं। इस सूचना पर सीबीआई ने उनको रंग हाथ गिरफ्तार करने की योजना बनाई और उनको रिश्वत का लेन-देन करते वक्त दबोच लिया। तत्पश्चात सीबीआई ने आरोपियों के लखनऊ और जौनपुर स्थित आधा दर्जन से अधिक ठिकानों पर छापा मारकर नकदी व अन्य संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए हैं। सीबीआई तीनों को बृहस्पतिवार को अदालत के सामने पेश करेगी।
पहले भी सीबीआई के हत्थे चढ़ चुके हैं रेलवे के भ्रष्ट अफसर
सीबीआई ने उत्तर रेलवे के चारबाग स्थित निर्माण विभाग के डिप्टी चीफ इंजीनियर को घूस के मामले में गिरफ्तार कर उसके कई ठिकानों पर छापा मारा और 52 लाख रुपये बरामद किए। लेकिन यह कोई पहला मामला नहीं है, इससे पूर्व भी रेलवे के भ्रष्ट अफसर सीबीआई के हत्थे चढ़ चुके हैं, जिससे भ्रष्टाचार की पोल परत दर परत खुली है। उत्तर रेलवे का यही निर्माण विभाग गत वर्ष दिसम्बर में भी सुर्खियां बटोर चुका है। दस दिसम्बर, 2022 को सीबीआई ने छापा मारकर डिप्टी चीफ इंजीनियर अरुण कुमार मित्तल को पचास हजार रुपये घूस के साथ रंगे हाथ पकड़ा था।
बताया जाता है कि ठेकेदार की शिकायत पर यह कार्रवाई हुई थी। इसके बाद सीबीआई ने कई दिनों तक निर्माण विभाग, उत्तर रेलवे के आला अफसरों से पूछताछ की। जबकि इसी वर्ष तीन जून को आलमबाग में कैरिज एंड वैगन वर्कशॉप के पास स्थित सामग्री विभाग के उप मुख्य सामग्री प्रबंधक आलोक मिश्र को सीबीआई ने लम्बित बिलों के भुगतान के एवज में 32.10 लाख रुपये के साथ गिरफ्तार किया था। उनके कई ठिकानों पर छापा मारा गया था। इतना ही नहीं सीबीआई ने 22 फरवरी, 2023 को आगरा में दो रेलवे अफसरों मुकेश कुमार व विजय सिंह को गिरफ्तार किया था। बिल पास कराने के एवज में पांच लाख रुपये की घूस ले रहे थे। वहीं 12 सितम्बर, 2023 को सीबीआई ने पूर्वोत्तर रेलवे मुख्यालय गोरखपुर में छापा मारकर प्रमुख मुख्य सामग्री प्रबंधक केसी जोशी को पांच लाख रुपये घूस लेते दबोचा था।
छापेमारी से बढ़ गईं अफसरों की धड़कनें
सीबीआई की टीम बुधवार दोपहर निर्माण विभाग में पूछताछ के लिए जैसे पहुंची, कर्मचारी घबराकर बाहर निकल आए। अफसर कुछ समझ पाते, सीबीआई की टीम ने निर्माण कार्यों की जुड़ी फाइलों को कब्जे में ले लिया। तीन घंटे तक जांच के बाद कर्मचारियों, अधिकारियों को कमरे में जाने की अनुमति मिली। सूत्र बताते हैं कि सीबीआई की टीम लखनऊ मंडल में चल रहे निर्माण कार्यों, प्रोजेक्ट से जुड़ी योजनाओं की फाइलें ले गई है।