प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अभ्यर्थियों की सहूलियत और सुविधा का पूरा ध्यान दिया जाएगा। लेकिन, अभ्यर्थियों को परीक्षा देने गृह मंडल से बाहर जाना पड़ेगा। पेपर लीक व अन्य चुनौतियों से निपटने के लिए भर्ती परीक्षाओं में अधिकाधिक फुलप्रूफ तकनीक का प्रयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी है। तय हुआ कि परीक्षा केंद्र उन्हीं शिक्षण संस्थाओं को बनाया जाएगा जो तय मानक पर खरे उतरेंगे। इसके लिए मानक तय कर दिए गए हैं। बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि अभ्यर्थियों को परीक्षा के लिए ज्यादा दूरी न तय करनी पड़े। लेकिन परीक्षा केंद्र मंडल के बाहर ही आवंटित किए जाएं। प्रयास किया जाए कि परीक्षा केंद्र नजदीकी मंडलों में दिए जाएं। पूरब के अभ्यर्थी को पश्चिम और उत्तर वाले को दक्षिण न भेजा जाए।
पेपरलीक जैसी घटनाओं से बचाने के लिए एक से अधिक प्रश्नपत्र छपाने पर सहमति बनी। कौन सा प्रश्नपत्र उपयोग किया जाए, यह परीक्षा से ठीक पहले तय हो। इसके अलावा प्रत्येक प्रश्नपत्र के कई-कई सेट बनाने की व्यवस्था अपनाई जाती रहेगी। प्रश्नों का रैंडमाइजेशन किया जाएगा।
एक साथ फार्म भरने वाले एक केंद्र पर नहीं पड़ेंगे
कई बार यह बात सामने आई है कि जितने लोगों ने किसी एक साइबर कैफे, कंप्यूटर से आवेदन किया, सभी एक ही केंद्र पर और कई बार तो एक ही कमरे में क्रम से पड़ गए। अब ऐसी स्थिति नहीं होगी। बैठक में सहमति बनी है कि आवेदन के साफ्टवेयर में ही रैंडमाइजेशन की व्यवस्था कर दी जाए। इससे एक कक्ष या एक केंद्र पर एक साथ आवेदन करने वालों के पड़ने की संभावना खत्म हो जाएगी।
किस परीक्षा केंद्र पर कितने अभ्यर्थी आवंटित किए जाएं, इसके लिए कोई संख्या तय नहीं की जाएगी। सदस्यों का कहना है कि मानक पूरा करने वाले केंद्रों पर प्राथमिकता के आधार पर जितने अभ्यर्थी बैठ सकते हैं, उन्हें आवंटित किया जाए। मसलन, किसी राजकीय डिग्री कॉलेज या इंटर कालेज में 1000-1500-2000 अभ्यर्थी बैठक सकते हैं और इसके लिए वहां सभी मानक पूरे होते हैं। तो इस आधार पर उसे इससे कम संख्या पर सीमित करना ठीक नहीं होगा। उसे क्षमता के हिसाब से 1000-1500-2000 अभ्यर्थी दिए जाएं। ऐसी स्थिति में बेहतर प्रबंधन के लिए संख्या के हिसाब से केंद्र को तीन-चार सेक्टर में बांट दिया जाए। उसकी व्यवस्था के लिए कॉलेज प्राचार्य को मुख्य व्यवस्थापक और अन्य वरिष्ठ अध्यापकों को सेंटर प्रभारी बनाकर परीक्षा कराई जाए।
भर्ती परीक्षाओं के लिए प्रश्नपत्र बनाने और मूल्यांकन करने वाले विशेषज्ञों को आकर्षित करने के लिए समिति में मौजूदा मानदेय को बढ़ाने पर सहमति बन गई है। हालांकि मानदेय कितना बढ़े, इस पर अभी फैसला नहीं हुआ है। समिति ने कहा है कि मानदेय पर निर्णय से पहले राज्य के सभी भर्ती संस्थाओं व लोक सेवा आयोग के मानदेय का अध्ययन कर लिया जाए। इसके बाद सहमति दी जाए।
राज्य के बाहर छपेंगे परीक्षा के पेपर
सूत्रों ने बताया कि पेपर लीक जैसी घटनाओं पर अंकुश के लिए प्रदेश के बाहर की अच्छे रेपुटेशन वाले प्रिंटिंग प्रेसों से ही प्रश्नपत्र छपाने पर सहमति बनी है। चयन आयोग प्रिंटिंग प्रेस करने के पहले अपने स्तर पर देखेंगे कि संबंधित प्रेस के पास अपना निजी इन्फ्रास्ट्रक्चर है। वह इस काम में किसी दूसरे से सहयोग तो नहीं लेगा? चयन आयोग संवेदनशील मुद्दा होने की वजह से पेपर छपाने वाले प्रिंटिंग प्रेस के बारे में गोपनीयता बरतते हैं। समिति में सहमति बनी है कि छपाई के बारे में साझे की कोई जरूरत नहीं है लेकिन यदि कोई चयन आयोग या बोर्ड किसी प्रिंटिंग प्रेस को ब्लेकलिस्ट करता है वह यह सूचना अन्य आयोगों से भी साझा करेगा। इससे दागी प्रिंटिंग प्रेस से दूसरी भर्ती संस्थाएं पेपर छपाने से बच सकेंगी।