बख्शी का तालाब। इटौंजा के गांव इकडरिया में बाढ़ का गंदा पानी पीकर मवेशी निमोनिया का शिकार हो रहे हैं। जानकारी होने पर पशु चिकित्सक की टीम ने गांव पहुंच कर वहां स्थिति का जायजा लिया। मृत व बीमार मवेशियों के पशु पालकों से बातचीत कर उनका डेटा कलेक्ट किया। इसके अलावा सुल्तानपुर, बहादुरपुर क्षेत्र के मार्ग पर अभी भी बाढ़ का पानी तेज रफ्तार से बह रहा है।
इकडरिया कला व खुर्द गांव में कुछ किसानों के मवेशियों की मौत हो गई है। इसके अलावा कुछ ग्रामीणों के पशु बीमार चल रहे हैं। एडीएम के निर्देश पर मंगलवार को पशु चिकित्सकों की एक टीम ने गांव पहुंच कर संबंधित पशु पालकों से बातचीत कर स्थिति जानी। टीम ने सात मृत मवेशियों की रिपोर्ट प्रशासन को भेजी है। पशु चिकित्सक दिग्विजय सिंह यादव ने दावा किया कि इन सभी सात पशुओं की मौत गलाघोंटू बीमारी से नहीं बल्कि बाढ़ का गंदा पानी पीने से हुई है।
पशु चिकित्सक के इस दावे के बाद अब यहां पशुपालकों के सामने मवेशियों के साथ-साथ ग्रामीणों के लिए भी साफ पेयजल का संकट खड़ा हो गया है। किसानों का कहना है चारों तरफ बाढ़ का पानी भरा है। हैंडपंप व सबमर्सिबल से बाढ़ का पानी निकल रहा है। ऐसे में साफ सुथरा पीने का पानी कहां से लाएं।
वहीं सुल्तानपुर और बहादुरपुर गांव में बाढ़ के दौरान किसी भी मवेशी की मौत न होने की रिपोर्ट पशु चिकित्सक करुणेश उपाध्याय ने प्रशासन को भेजी है, जबकि तीन दिन पहले सरोसे की बीमार भैंस के बच्चे की मौत हो गई थी। कई पशुपालकों के मवेशी अभी भी बीमार हैं।
20 स्कूली बच्चों ने ट्रैक्टर-ट्रॉली से पार किया तेज धार
लखनऊ। प्रशासन का दावा है कि बाढ़ग्रस्त गांवों में एक मोटर बोट सहित 13 नाव की व्यवस्था ग्रामीणों के आवागमन के लिए की गई है। खासकर स्कूली बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उनके नाव से आवागमन में विशेष सतर्कता बरती जा रही है, लेकिन मंगलवार को एक तस्वीर ने प्रशासन के इस दावों को खोखला सबित कर दिया। बदइंतजामी के बीच करीब 20 स्कूली बच्चे और बच्चियां बाढ़ के पानी की तेज धार को ट्रैक्टर-ट्रॉली से पार करते नजर आए। एक बार यह ट्रैक्टर-ट्रॉली पानी के बीच कटी सड़क पर लड़खड़ाई भी गई, लेकिन फिर चालक ने किसी तरह उसे संभाल लिया। सुल्तानुपर, बहादुरपुर जा रही इस ट्रैक्टर-ट्रॉली पर बैठे बच्चों को किसी ने न तो रोका न टोका, जबकि मौके पर कानूनगो, लेखपाल व पुलिसकर्मी भी मौजूद थे।
राजस्व कर्मियों पर दिखाया गुस्सा
इकडरिया गांव की चंद्रकली, पूनम, सुखरानी और लासा की सुशीला, जयदेवी, सुमन और शांति मंगलवार को गांव से बाहर निकलकर सड़क पर अधिकारियों से अपनी व्यथा बताने जा पहुंची। वहां मिले कर्मचारियों को खरीखोटी सुनाते हुए कहा कि उनके घरों में घुटनों तक पानी भरा हुआ है, लेकिन कोई देखने वाला नहीं है। भोजन और साफ पानी तक का संकट है। कर्मचारियों ने यह कह कर उन्हें वापस भेज दिया कि वे लोग अपनी समस्याएं अधिकारियों को बताएं।
बाढ़ के बीच से जाते लोग।
बाढ़ के बीच से जाते लोग।
बाढ़ के बीच से जाते लोग।