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यूपीः मायावती सरकार के भ्रष्ट मंत्री पर जल्द चलेगा केस

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बसपा सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री रहे राकेश धर त्रिपाठी पर विजिलेंस का शिकंजा कसना शुरू हो गया है। राज्यपाल राम नाईक ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कोर्ट में अभियोग चलाने की अनुमति प्रदान कर दी है। जांच एजेंसी अब उनके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर उन्हें गिरफ्तार भी कर सकती है।
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बताते चलें कि पूर्व मंत्री के खिलाफ हुई जांच में उनके द्वारा ज्ञात साधनों से 295 फीसदी अधिक संपत्ति अर्जित करने के सुबूत मिले थे। इतनी अधिक संपत्ति उन्होंने कैसे अर्जित की, इसका वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके थे।

बसपा के सत्ता से बाहर जाने के बाद सपा सरकार ने अपने शुरुआती दिनों में ही विजिलेंस को भ्रष्टाचार के आरोप में फंसने वाले पूर्व मंत्रियों के खिलाफ जांच करने का निर्देश दिया था।
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विजिलेंस को मिले कई ठोस सुबूत

अप्रैल-मई 2013 में विजिलेंस ने राज्य सरकार से तीन पूर्व मंत्रियों रंगनाथ मिश्र, अवध पाल सिंह यादव व बादशाह सिंह के खिलाफ चल रही जांच में आरोप सही पाते हुए उनके खिलाफ अरोप पत्र दाखिल करने की अनुमति मांगी थी।

त्रिपाठी के खिलाफ विजिलेंस को कई ठोस सुबूत हासिल हुए थे। इस दौरान लैकफेड घोटाले में भी उनसे पूछताछ की गई थी। विजिलेंस ने अपनी खुली जांच में पाया था कि 13 मई 2007 से पांच अक्तूबर 2011 तक उच्च शिक्षा मंत्री रहने के दौरान उन्होंने अकूत संपत्ति अर्जित की थी।

जबकि, उनके वैध संसाधनों से कुल आय 45,82,215 रुपये ही थी, लेकिन अर्जित परिसंपत्तियॉं व व्यय 1,81,20,566 रुपये पाया गया था। इस प्रकार विवेचना में प्रथम दृष्टया वैध आय से 1,35,38,351 रुपये अधिक आय मिली जो 295 प्रतिशत ज्यादा है ।
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चार पूर्व मंत्रियों के खिलाफ मुकदमे की मंजूरी का इंतजार

विजिलेंस ने मई 2013 में राज्य सरकार से बसपा सरकार के पांच मंत्रियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू करने की अनुमति मांगी थी।

इसमें राकेश धर त्रिपाठी के अलावा पूर्व मंत्री चंद्रदेव राम यादव, नसीमुद्दीन सिद्दीकी, रामवीर उपाध्याय और बाबूसिंह कुशवाहा का नाम शामिल है।

इन सभी के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति का मामला लंबित चल रहा है। केवल त्रिपाठी के खिलाफ स्वीकृति मिली है। शेष चार पूर्व मंत्रियों के खिलाफ स्वीकृति का इंतजार है।
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