फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जमीन मामले में बुरे फंसे सपा नेता बुक्कल नवाब, केस दर्ज

Thu, 13 Apr 2017 02:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
सपा एमएलसी बुक्कल नवाब - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
गोमती नदी की जमीन को अपना बताने के लिए जाली दस्तावेज तैयार कराने के आरोप में सपा एमएलसी बुक्कल नवाब पर वजीरगंज थाने में बुधवार को एफआईआर दर्ज करवाई गई। इसमें जिला प्रशासन के अज्ञात अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया है।
विज्ञापन


इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के आदेश पर बनी हाई पावर जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर तहसीलदार सदर ने यह मुकदमा दर्ज कराया।

हाई पावर जांच समिति ने कहा था कि बुक्कल नवाब ने गोमती नदी के जियामऊ स्थित जमीन को अपना बताने के लिए 22 अगस्त, 1977 के एक फैसले का सहारा लिया। यह संदेहास्पद है।

दूसरी ओर अधिकारियों पर नामजद रिपोर्ट नहीं दर्ज करवाने पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए 24 अप्रैल को प्रमुख सचिव राजस्व को फिर तलब किया है।

ये था पूरा मामला

प्रमुख सचिव राजस्व अरविंद कुमार ने जस्टिस सुधीर अग्रवाल और जस्टिस राकेश श्रीवास्तव की पीठ के समक्ष हाजिर होकर मुकदमा दर्ज किए जाने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अगस्त 1977 में बेगम फख्र जहां के इंतकाल के बाद नायब तहसीलदार ने चिनहट ग्राम जियामऊ की जमीन को मजहर अली खान (बुक्कल नवाब) पुत्र आबिद अली खां निवासी शीशमहल के नाम कर दिया था।

इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई, जिसमें अक्तूबर 2016 के आदेश के अनुसार जांच समिति बनी और मार्च 2017 में समिति ने अपनी रिपोर्ट दी। इसमें कहा गया है कि अगस्त 1977 का निर्णय सच है या नहीं इस पर संदेह है। साथ ही इसी निर्णय के आधार पर राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी भी संदेह के दायरे में आती है।

हाईकोर्ट ने समिति की रिपोर्ट के आधार पर मार्च में ही प्रमुख सचिव राजस्व को उचित कार्रवाई करने के लिए कहा था। जिसमें एफआईआर करवाने और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जानी थी।

इस पर प्रमुख सचिव राजस्व ने 11 अप्रैल को एफआईआर के आदेश दिए और 12 अप्रैल को एफआईआर दर्ज करवाई गई।

एफआईआर में अधिकारियों को ‘अज्ञात’ रखने पर हाईकोर्ट नाराज

मामले में याची के अधिवक्ता अनुप्रताप सिंह ने बताया हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव राजस्व को मामले की अगली सुनवाई के लिए रखी गई तारीख 24 अप्रैल को फिर से बुलाया है। उन्हें जवाब देना होगा कि अधिकारियों पर एफआईआर क्यों नहीं कराई गई?

एफआईआर में किसी अधिकारी को नामजद नहीं किया गया है, बल्कि ‘संलिप्त अन्य व्यक्तियों व संबंधित अधिकारी व कर्मचारीगण नाम पता अज्ञात’ दर्ज कराया गया है। अधिकारियों को बचाए जाने पर हाईकोर्ट नाखुशी जाहिर की है।

अतिरिक्त जांच रिपोर्ट सौंपी
दूसरी ओर हाईकोर्ट के निर्देश पर विशेष सचिव राजस्व जयप्रकाश सागर और विशेष सचिव न्याय विपिन कुमार द्वारा बनाई गई हाई पावर्ड जांच समिति ने अपनी अतिरिक्त जांच रिपोर्ट भी बुधवार को हाईकोर्ट को सौंपी। इसे सीलबंद किया गया है।
विज्ञापन

एफआईआर में ये धाराएं और आरोप

आईपीसी 420 : धोखाधड़ी से संपत्ति अर्जित की। आरोप साबित होने पर अधिकतम सात वर्ष कारावास और जुर्माना।

आईपीसी 467 : जाली वसीयत रची। आरोप सिद्ध होने पर उम्रकैद या कारावास और जुर्माने की सजा का प्रावधान।

आईपीसी 468 : धोखा देने की नीयत से जाली दस्तावेज रचे। आरोप सिद्ध होने पर अधिकतम सात वर्ष कारावास और जुर्माना।

आईपीसी 471 : जाली दस्तावेज जिसके जाली होने की जानकारी होते हुए भी उसे असली बताते हुए उपयोग करना। इसमें भी जाली दस्तावेज रचने के बराबर सजा का प्रावधान।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें