एफआईआर के मुताबिक वर्ष 2006 में तत्कालीन सीओ हबीबुल हसन व आठ अन्य लोगों के खिलाफ डकैती व एससी-एसटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज हुई थी। विवेचना के दौरान इस मामले में 30 जून 2015 को अंतिम रिपोर्ट लगा दी गई थी। इसके बाद सभी परचे और दस्तावेज न्यायालय में दाखिल करने के लिए सीओ अलीगंज कार्यालय से तत्कालीन डाक रनर हेड कांस्टेबल सूर्य भान को 12 जुलाई 2018 को दिया गया था। सूर्य भान ने सभी दस्तावेज का उल्लेख वापसी में थाने के रोस्टर में अंकित किया था। ये दस्तावेज मड़ियांव में डाक का काम देख रहे तत्कालीन हेड कांस्टेबल राजेंद्र सिंह को सुपुर्द कर दिया गया था। राजेंद्र कुमार की ओर से मुकदमे की अंतिम रिपोर्ट न्यायालय में दाखिल करने के लिए मड़ियांव थाने में अपराध का काम देखने वाले तत्कालीन कांस्टेबल प्रदीप मिश्रा को दिया जाना बताया गया है। हालांकि, इसका कोई प्रमाणिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं है।
खास बात ये है कि इसका जिक्र भी थाने के रिकॉर्ड में नहीं है। यही नहीं, छानबीन में सामने आया है कि अंतिम रिपोर्ट न्यायालय में दाखिल नहीं की गई है। प्रारंभिक जांच में प्रदीप मिश्रा की लापरवाही सामने आई है। डीसीपी उत्तरी के निर्देश पर इंस्पेक्टर मड़ियांव ने आरोपी सिपाही के खिलाफ केस दर्ज कराया है। आरोपी सिपाही से पूछताछ के बाद पूरा मामला स्पष्ट होगा।