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अस्पताल की लापरवाही, चार साल तक पेट में पड़ा रहा पाइप

Mon, 25 Apr 2016 03:41 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ

सार

  •  एरा मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरो की लापरवाही, पेट में छोड़ा डीजे स्टेंट
  • लोहिया संस्थान के यूरोलॉजी विभाग में दोबारा हुआ ऑपरेशन
  •  समाज सेवी अपर्णा यादव ने लोहिया संस्थान में अपने खर्चे पर करवाया आपरेशन
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अंबिका प्रसाद मौर्या को थी पथरी की ‌शिकायत - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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पेट में चार साल से पड़े एक फीट लंबे डीजे स्टेंट को लोहिया संस्थान के डॉक्टरों ने निकाल दिया है। एरा मेडिकल कॉलेज में पत्थरी के ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों की तरफ से छोड़ गए डीजे स्टेंट से मरीज की परेशानी और बढ़ गई थी।
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मरीज के दोबारा एक्सरे कराने पर डीजे स्टेंट का पता चला। आरोप है कि जब मरीज ने इस संबंध में वहां शिकायत की तो उसे एरा अस्पताल से भगा दिया गया। 
  
इंदिरानगर निवासी अंबिका प्रसाद मौर्या (30) को पथरी की शिकायत थी। अंबिका ने एरा मेडिकल कॉलेज में ऑपरेशन कराया था।

इस दौरान डॉक्टरों ने लापरवाही बरतते हुए पेट में डीजे स्टेंट छोड़ दिया था। अंबिका को जब एरा अस्पताल से भगा दिया गया तो उसने समाज सेवी अपर्णा यादव से मिला।

मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने अपने खर्च पर पीड़ित का लोहिया संस्थान में ऑपरेशन करवाया। लोहिया संस्थान के यूरोलॉजी विभाग के डॉ. ईश्वर राम ध्याल ने बताया कि जांच में पता चला कि अंबिका के पेट में डीजे स्टेंट पड़ा है।
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इसे देखते हुए छोटी सजरी के जरिए डीजे स्टेंट को निकाल दिया गया। उन्होंने बताया कि डीजे स्टेंट ऑपरेशन के दो से तीन सप्ताह के भीतर निकाल दिया जाना चाहिए। 
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एक्स-रे - फोटो : amar ujala
उन्होंने बताया कि डीजे स्टेंट ऑपरेशन के दौरान नली में डाला जाता है जिससे वह आपस में न चिपके। नली आपस में चिपक जाएगी तो गुर्दे खराब होने का डर रहता है। डीजे स्टेंट भीतर पड़ा होने से मरीज का 30 मार्च को ऑपरेशन किया गया और करीब एक फीट लंबे स्टेंट को बाहर निकाल दिया गया।

मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ है हालांकि सावधानी बरतने के लिए कहा गया है। चार साल से डीजे स्टेंट पेट के भीतर पड़ा रहने पर डॉक्टर भी हैरत में है। डॉक्टरों का कहना है कि इतने समय में कई तरह की दिक्कतें आती हैं। इससे मरीज की जान भी जा सकती है। 

 ऐसा रहा पेट में पाइप का सफर
- 1 नवंबर 2011 के एरा मेडिकल कॉलेज में भर्ती
- 5 नवंबर को दो डॉक्टरों ने ऑपरेशन किया
- 17 नवंबर 2011 को डिस्चार्ज कर दिया गया

- 22 नवंबर को डॉक्टर ने दोबारा ऑपरेशन के लिए कहा
- 2014 तक दवा खाते रहे लेकिन पेट में दर्द बना रहा
- 8 जून 2015 को कराया एक्स-रे तो दिखा पेट में डीजे स्टेंट

- 30 मार्च 2016 को लोहिया संस्थान के यूरोलॉजी विभाग में भर्ती
- 31 मार्च 2016 को ऑपरेशन में निकला एक फीट लंबा पाइप
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