दिल के दर्द से वे तड़पते रहे। वे गरीब थे। सरकार ने इमदाद दी कि उनका इलाज हो जाए। वे अपनी जिंदगी जी सकें। पर, उस इमदाद से मरीजों की सर्जरी के लिए जरूरी सामान लाया गया। ये सामान स्टोर में यूं ही पड़ा रहा।
मरीजों को ऑपरेशन की डेट ही नहीं मिली। आखिरकार दिल के दर्द के इलाज के इंतजार में 18 मरीज इस दुनिया से रुख्सत हो गए...। दिल दहलाने वाली ये कहानी आई है देश के प्रतिष्ठित संस्थान केजीएमयू के कार्डियो थोरेसिक वैस्कुलर सर्जरी (सीटीवीएस) विभाग से। इसका खुलासा खुद विभाग के हेड डॉ. शेखर टंडन ने किया है
इसलिए दिल दहलाती है ये खबर ...
कानपुर रोड स्थित नवाबगंज के रहने वाले जगतपाल (50) हार्ट पेशेंट थे। पिछले साल 25 मार्च को उनकी मौत हो गई। जगतपाल बीपीएल श्रेणी में आते थे लिहाजा उनका इलाज सरकारी खर्च पर होना था।
केजीएमयू के सीवीटीएस विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक उनकी सर्जरी का सामान 13 फरवरी 2015 को आया था। शुक्रवार को उनके बेटे रज्जन ने बताया कि पिता की मौत के एक महीने बाद सर्जरी के लिए फोन आया था। पिता को बचा नहीं पाए और मुफ्त इलाज की आस में डेढ़ लाख रुपये खर्च हो गए।