रायबरेली रोड स्थित वृंदावान कॉलोनी फेज दो में संचालित पल्स हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टर 21 दिन तक रायबरेली के धुराई थाना खीरो के अनिरुद्ध कुमार मिश्रा (30) की जान से खिलवाड़ करते रहे।
अनिरुद्ध के भाई रामसरन ने दलाल की मदद से उसे 22 नवंबर को इस अस्पताल में भर्ती कराया था। दलाज मरीज के परिवारीजनों ने ऑपरेशन पर महज 20 हजार रुपये खर्च होने का झांसा दिया, लेकिन धीरे-धीरे डेढ़ लाख रुपये वसूल लिए गए।
इलाज पर खर्च बढ़ता गया तो मरीज के घर वालों को अपनी तीन बीघा खेत तक गिरवी करने को मजबूर होना पड़ा। ऑपरेशन के बाद अनिरुद्ध की हालत सुधरने के बजाय और बिगड़ती रही।
15 दिन तक हॉस्पिटल में भर्ती रखने के बाद गंभीर हालत में ही उसे डिस्चार्ज कर दिया। तबीयत और बिगड़ी तो दलाल एक बार फिर मरीज को इसी अस्पताल ले आया, लेकिन अनिरुद्ध के जख्म से तेज बदबू के चलते डॉक्टरों और स्टाफ ने मरहम-पट्टी करने से इन्कार कर दिया और 12 दिसंबर को उसे जबरन एंबुलेंस में लादकर ट्रॉमा सेंटर भेज दिया। जहां मरीज जिंदगी और मौत से जूझ रहा है। परिवारीजनों ने पल्स हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर के खिलाफ सीएमओ से लिखित शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है।
लेजर से ऑपरेशन बोला, लगाए 17 टांके
रामसरन ने बताया कि अनिरुद्ध को पेट में दर्द व कई अन्य परेशानियां थीं। उसे लालगंज के सरकारी अस्पताल में दिखाया तो डॉक्टर ने ऑपरेशन की सलाह दी। इसी बीच वहां मौजूद राजकुमार नाम के दलाल ने लखनऊ के वृंदावन स्थित पल्स हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर में सस्ते में लेजर ऑपरेशन कराने का झांसा दिया।
रामसरन ने बताया कि 22 नवंबर को अनिरूद्ध को पल्स हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। भर्ती होते ही पांच हजार का बिल बन गया। जबकि 26 नवंबर को ऑपरेशन से पहले 30 हजार रुपये जमा कराए गए। ऑपरेशन के दौरान चार यूनिट ब्लड डोनेट कर लाए।
डॉक्टरों बताया कि दाहिने तरफ की आंत में सड़न हो गई थी, जिसे निकाल दिया गया। जबकि पहले डॉक्टरों ने लेजर से ऑपरेशन की बात कही थी। ऑपरेशन थिएटर से जब अनिरुद्ध निकला तो उसके पेट पर लंबा चीरा लगा हुआ था जिस पर पट्टी लगी थी। दरअसल उसके पेट में 17 टांके लगे थे।
पेट से रिसता रहा खून, सिर्फ पट्टी बदलते रहे डॉक्टर
पेट पर पट्टी के बारे में पूछने पर डॉक्टरों ने कहा कि कुछ दिन बाद इसे हटा दिया जाएगा। लेकिन ऑपरेशन के बाद से अनिरुद्ध के ऑपरेशन वाली जगह से खून रिसता रहा। डॉक्टरों ने इसकी भरपाई के लिए दो यूनिट ब्लड मंगाने को कहा। डोनर नहीं मिलने पर परिवारीजनों ने ओपी चौधरी हॉस्पिटल से दस हजार रुपये देकर खून खरीदा।
ब्लड चढ़ने के बाद भी रक्तस्राव होता रहा। 6 दिसंबर को पेट पर लगे टांके टूट गए और पेट के भीतर का कुछ हिस्सा बाहर आ गया। इसके बाद डॉक्टर दोबारा ओटी ले गए और पट्टी बदलकर दोपहर तीन बजे जबरन डिस्चार्ज कर दिया।
दलाल ने फिर दिया झांसा, दोबारा कराया भर्ती
रामसरन ने बताया कि घर लौटने के बाद अनिरुद्ध की हालत तेजी से बिगड़ती गई। ऑपरेशन वाली जगह से जबर्दस्त बदबू आने लगी तो दो दिन बाद यानी 8 दिसंबर को दोबारा दलाल राजकुमार को फोन किया। दलाल ने अनिरुद्ध को भर्ती कराने की सलाह दी और अपनी गाड़ी उसे पल्स अस्पताल पहुंचाया। वहां डॉक्टरों ने भर्ती कर लिया और इलाज के नाम पर मरहम पट्टी करते रहे, लेकिन गंदे खून का रिसाव बंद नहीं हुआ।
जख्म से आने लगी बदबू तो इलाज किया बंद
अनिरुद्ध को अस्पताल में दोबारा भर्ती तो कर लिया, लेकिन जख्म से बदबू के चलते अगले दिन नौ दिसंबर से डॉक्टरों और स्टाफ ने उसकी मरहम-पट्टी करनी भी बंद कर दी। इसके बाद अस्पताल के संचालक, सर्जन और दूसरे डॉक्टर अनिरुद्ध को अस्पताल से बाहर ले जाने का दबाव बनाने लगे। अनिरुद्ध के परिवार वालों ने उसके बिना ठीक हुए वापस न जाने की बात कही तो डॉक्टरों ने इलाज बंद करने की धमकी दी और 12 दिसंबर को जबरन निजी एम्बुलेंस में लादकर ट्रॉमा सेंटर भेज दिया।
अगर मरीज मर जाए तो मुंह मत खोलना, बुरा अंजाम होगा
रामसरन ने बताया कि अनिरुद्ध के ऑपरेशन के लिए पहले सिर्फ 20 हजार रुपये का खर्च बताया गया था। भर्ती होने के बाद से बिल बनने का सिलसिला शुरू हुआ तो वह डेढ़ लाख रुपये के करीब पहुंच गया। 22 नवंबर को भर्ती होते ही डॉक्टरों ने पांच हजार रुपये जमा करवाए।
23 नवंबर को 25,000, 24 नवंबर को 3,700, 25 नवंबर को 5,000, 26 नवंबर को 4,500, 27 नवंबर को 850, 28 नवंबरको 5,000, 29 नवंबर को 5,000 रुपये जमा करवाए। इसके अलावा दवा और इंजेक्शन सादे कागज पर लिखा, जिसे खरीदने में 30 हजार रुपये खर्च हो गए।
इसके बाद चार दिसंबर को 5,000, पांच दिसंबर को 5,000, छह को 5,000, नौ दिसंबर को 500 और 12 दिसंबर को को 200 रुपये जमा कराए। इसके अलावा चार यूनिट ब्लड के लिए 13 हजार रुपये ओपी चौधरी हॉस्पिटल के ब्लड बैंक में जमा करवाया गया।
सादे कागज पर लगवाया अंगूठा
रामसरन ने बताया कि 12 दिसंबर को जब डॉक्टरों ने अस्पताल से भगाया तो सादे कागज पर जबरन अंगूठा लगवाया गया था। दलाल राजकुमार, अस्पताल के संचालक और दूसरे डॉक्टरों ने धमकी दी थी कि चुपचाप ट्रॉमा में इलाज कराना। अगर तुम्हारा मरीज मर जाए तो भी मुंह मत खोलना। कहीं शिकायत की तो पूरे परिवार का बुरा अंजाम होगा।
अनिरुद्ध के मामा विजय कुमार और भाई दिलीप कुमार मिश्रा का आरोप है कि डॉक्टरों ने अपनी गलती छुपाने के लिए सादे कागज पर अंगूठा लगवाया, ताकि बाद में सादे कागज पर मनमर्जी का बयान लिखकर अपना बचाव कर सकें।
ऑपरेशन से पहले दौड़ाया और खूब की वसूली
ऑपरेशन से पहले अनिरूद्ध को पल्स हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने खूब चक्कर लगवाए। पैथोलॉजी जांच के लिए वृंदावन स्थित लखनऊ पैथ लौबोरेटरीज में खून की जांच के लिए कई बार दौड़ाया गया। इसके अलावा एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन जांच के लिए 20 हजार रुपये से अधिक जांच के नाम पर वसूल लिए।
दलाल तो सीधे पहुंचाता है पल्स अस्पताल
अमर उजाला संवाददाता ने जब दलाल राजकुमार के मोबाइल नंबर 9919063897 पर फोन कर पूछा कि एक मरीज लालगंज अस्पताल में है उसका पथरी का ऑपरेशन होना है तो उसने कहा... हां, हो जाएगा। अभी हमारे यहां एक बुजुर्ग की मौत हो गई है। मरीज को तेलीबाग स्थित वृंदावन अस्पताल लेकर जाओ। वहां पहुंचना तो मैं फोन कर दूंगा और मरीज का लेजर से ऑपरेशन 18 से 20 हजार रुपये में हो जाएगा। दलाल राजकुमार ने ये भी कहा कि अगर जल्दी न हो तो दो दिन रुक जाओ। मैं खुद अपनी गाड़ी से अस्पताल पहुंचा दूंगा।
मरीज का कोई ऑपरेटिव रिकॉर्ड नहीं दिया
मामले पर केजीएमयू के सर्जन डॉ. अरशद अहमद ने कहा कि 12 दिसंबर को ट्रॉमा सेंटर पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने अनिरुद्ध को पहले तल पर स्थित पीसी दुबे वार्ड के आरएसओ दो में बेड नंबर एक पर भर्ती कराया। पल्स हॉस्पिटल में उसकी आंत निकाली गई है। हो सकता है कि उसकी कुछ नर्व्स डैमेज हो गई हों, जिससे लगातार ब्लीडिंग हो रही है। मरीज जब ट्रॉमा सेंटर पहुंचा था तो पल्स हॉस्पिटल के कई रिकॉर्ड उसके पास थे लेकिन ऑपरेटिव रिकॉर्ड कोई नहीं था। इससे ये पता नहीं चल सका कि ऑपरेशन कैसे और किस अंग का हुआ है।
संभव है ऑपरेशन से दूसरे अंगों को नुकसान हो गया हो, जिससे लगातार खून बह रहा है। मरीज की हालत बहुत खराब है और उसका दोबारा ऑपरेशन करना पड़ेगा, जिससे संक्रमित हिस्से को निकालने के साथ डैमेज को रिपेयर किया जा सके। हालांकि अभी उसकी स्थिति ऑपरेशन लायक नहीं है।
सीएमओ से शिकायत! सब देख लिया जाएगा
पल्स हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर के संचालक डॉ. वीरेंद्र यादव का कहना है कि रायबरेली के अनिरुद्ध का ऑपरेशन आलमबाग के अवध हॉस्पिटल में बैठने वाले सर्जन डॉ. परेश शुक्ला ने किया था। आंत हटाने के लिए लैप्रोस्कोप सर्जरी नहीं होती है। मरीज की ओपन सर्जरी की गई थी। जांच में पता चला था कि उसकी आंत फंस गई है। सर्जरी के दौरान देखा गया तो आंत फट गई थी। फटी आंत का रिपेयर किया गया। हो सकता है कि स्टिच के बाद आंत में कहीं से लीकेज हो गया हो, जिससे ऐसी स्थिति हो गई है। मरीज का पूरा इलाज किया गया। हालत बिगड़ने पर ट्रॉमा सेंटर भेजा गया। (तस्वीर में- सीएमओ-डॉ. एसएनएस यादव)
इलाज पर खर्च हुए 18 हजार रुपये जमा न करने से पूरा बिल नहीं दिया गया है। आंत के ऑपरेशन में 50 से 60 हजार रुपये का खर्च आता है। डेढ़ लाख रुपये लेने की बात गलत है। इस मामले की शिकायत सीएमओ से हुई है तो कोई बात नहीं, सब देख लिया जाएगा।
आंत के ऑपरेशन की फीस केवल 5000 रुपये
वहीं, अनिरूद्घ का ऑपरेशन करने वाले सर्जन डॉ. परेश शुक्ला का कहना है कि रायबरेली के मरीज अनिरुद्ध का ऑपरेशन मैंने ही 26 नवंबर को किया था। मरीज की छोटी आंत पूरी तरह सड़ चुकी थी। ऑपरेशन में 50 फीसदी आंत को निकाल दिया गया था। बाकी में भी हल्की सड़न थी, जिसे रिपेयर किया गया था। मरीज कई अस्पतालों से होते हुए बहुत देर में आया था। ऑपरेशन के बाद एक दिन मैंने देखा था, लेकिन उसके बाद उसका क्या हुआ मुझे नहीं पता। इसकी जानकारी पल्स अस्पताल के संचालक और डॉक्टर ही दे सकते हैं।
अस्पताल पर होगी कड़ी कार्रवाई
मामले पर सीएमओ डॉ. एसएनएस यादव का कहना है कि पल्स हॉस्पिटल में मरीज के ऑपरेशन के बाद हालत बिगड़ने और डेढ़ लाख रुपये ऑपरेशन फीस लेने की जानकारी नहीं मिली है। मामले की लिखित शिकायत कैंप कार्यालय में आई होगी तो वह मुझे एक दो दिन बाद मिलती है। (स्वास्थ्य राज्य मंत्री डॉ. एसपी यादव, फोटो में)
इस संबंध में कैंप कार्यालय या शिकायत प्रकोष्ठ में बैठने वाले कर्मचारियों से पूछताछ कर शिकायत की कॉपी मंगवाई जाएगी। शिकायत और मरीज के परिवारीजनों से इलाज का पूरा ब्यौरा लेकर अस्पताल में छापेमारी कर छानबीन की जाएगी। मरीजों के इलाज के नाम पर लूट या जान से खिलवाड़ किसी हालत में नहीं होने दिया जाएगा।
सीएमओ की टीम करेगी छापेमारी
इस स्वास्थ्य राज्य मंत्री डॉ. एसपी यादव का कहना है कि पल्स हॉस्पिटल में आंत के ऑपरेशन के लिए पहुंचे मरीज से डेढ़ लाख रुपये की वसूली और बाद में उसे ट्रॉमा सेंटर भगाने का मामला गंभीर है।
इस मामले में सीएमओ को पल्स हॉस्पिटल के खिलाफ जांच कराकर कड़ी कार्रवाई के लिए निर्देश दिया जाएगा। राजधानी के प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों के साथ किसी तरह की मनमानी नहीं होने दी जाएगी।
21 दिन तक मरीज की जान से खेलते रहे डॉक्टर
22 नवंबर: अनिरुद्ध को पल्स हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।
26 नवंबर: रात आठ बजे ऑपरेशन शुरू हुआ जो दो घंटे चला
6 दिसंबर: अनिरुद्ध की हालत बिगड़ने लगी और टांके टूट गए। शरीर के भीतर का कुछ हिस्सा बाहर आ गया।
6 दिसंबर: ओटी पट्टी बदलकर नाजुक हालत में ही दोपहर तीन बजे मरीज को जबरन डिस्चार्ज कर दिया।
8 दिसंबर: अनिरुद्ध की हालत तेजी से बिगड़ती गई और ऑपरेशन वाली जगह से भयंकर बदबू आने लगी। दलाल राजकुमार अपनी गाड़ी से अनिरुद्ध को पल्स हॉस्पिटल पहुंचाया। हॉस्पिटल में भर्ती किया गया, पर सिर्फ मरहम-पट्टी की गई।
9 दिसंबर: जख्म से तेज बदबू के चलते डॉक्टरों और स्टाफ ने मरहम-पट्टी करना भी बंद कर दिया। अस्पताल के संचालक, सर्जन और दूसरे डॉक्टर अनिरुद्ध को अस्पताल से बाहर ले जाने का दबाव बनाने लगे। न ले जाने पर इलाज बंद करने की धमकी दी।
12 दिसंबर: जबरन निजी एम्बुलेंस में मरीज को लादकर ट्रॉमा सेंटर भेज दिया। (डा. अरशद अहमद, सर्जन, केजीएमयू, फोटो में)