केजीएमयू के डॉक्टरों की लापरवाही थमने का नाम नहीं ले रही है। रीढ़ की हड्डी में हुए कैंसर को दस माह तक डॉक्टर नहीं पकड़ पाए। डॉक्टर, पहले तो मरीज की नस दबने और फिर बोन टीबी की दवा चार माह तक खिलाते रहे। मर्ज बढ़ने पर दो-दो बार एमआरआई कराई गई। इसके बाद बायोप्सी कराई गई। जांच में मरीज को कैंसर की पुष्टि हुई है। इस दौरान इलाज के नाम पर करीब पांच लाख रुपये खर्च हो गए। तीमारदारों ने केजीएमयू डॉक्टरों से शिकायत की है। डॉक्टरों ने उसे रेडियोथेरेपी विभाग रेफ र कर दिया है। अब वहां डॉक्टर उसे भर्ती नहीं ले रहे हैं। वह तीन दिन से रेडियोथेरेपी विभाग के बरामदे में स्ट्रेचर पर पड़ा तड़प रहा है।