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लापरवाहीः एचआईवी मरीज के आईवी सेट से सामान्य रोगी को चढ़ा दी दवा, जांच के आदेश

Sat, 11 Jul 2020 04:46 PM IST
ishwar ashish हिमांशु अवस्थी, अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
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सिविल अस्पताल में बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां एचआईवी मरीज को सामान्य रोगी के साथ हड्डी रोग विभाग में भर्ती कर दिया गया। इतना ही नहीं एचआईवी मरीज का आईवी सेट निकालकर सामान्य रोगी को लगा दिया गया। इसकी जानकारी होने पर तीमारदार ने हंगामा किया। मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। 
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संक्रमित मरीज को गलत तरीके से भर्ती करने वाले डॉक्टर से भी जवाब तलब किया गया है। उधर, डॉक्टरों ने सामान्य रोगी की एचआईवी की पहली जांच करा ली है, जिसकी रिपोर्ट अभी निगेटिव है। हालांकि, अन्य जांचों की रिपोर्ट आना बाकी है, जिससे साफ  होगा कि मरीज संक्रमित है या नहीं।

हरदोई के संडीला निवासी संविदा पर सफाईकर्मी का पिता (60) एचआईवी पीड़ित है। पैर में दिक्कत होने पर करीब तीन दिन पहले उसे सिविल के हड्डी रोग विभाग में भर्ती कर लिया गया। उसके बगल वाले बेड पर उदयगंज निवासी दूसरा सामान्य रोगी था। आरोप है कि दो दिन पहले नर्स ने वार्ड ब्वॉय से उदयगंज के मरीज को आईवी सेट लगाने को कहा। इस पर उसने एचआईवी संक्रमित का आईवी सेट निकालकर उसे लगा दिया और दवा भी चढ़ा दी गई। 
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तीन हफ्ते बाद दोबारा होगी मरीज की जांच

महिला तीमारदार को इसकी जानकारी हुई तो उसने रात में डॉक्टर से शिकायत की। इस पर ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने आनन-फानन आईवी सेट हटवाया। महिला ने लापरवाही की शिकायत अस्पताल निदेशक डॉ. डीएस नेगी से की तो उन्होंने जांच के आदेश दिए। एचआईवी रोगी को भर्ती करने वाले डॉक्टर, दो स्टॉफ नर्स व वार्ड ब्वॉय से जवाब तलब किया गया है।

एचआईवी मरीज का आईवी सेट सामान्य रोगी को लगाने से उसमें संक्रमण की पुष्टि के लिए तीन हफ्ते बाद दोबारा मरीज की जांच कराई जाएगी। उसका खून का नमूना जांच को भेजा जाएगा। उसे दवा भी दी जा रही है।

पीसीआर टेस्ट में तीन हफ्ते  में होती है पुष्टि
केजीएमयू एआरटी सेंटर के प्रभारी डॉ. डी हिमांशु के मुताबिक, एचआईवी रोगी का आईवी सेट दूसरे मरीज को लगाना गलत है। यदि मरीज में संक्रमण पहुंचा तो इसकी पुख्ता जानकारी तीन हफ्ते बाद पीसीआई टेस्ट से हो सकेगी। एंटीबॉडी टेस्ट छह माह पर होता है। संक्रमण को दवा से रोका जा सकता है।

एचआईवी रोगियों के इलाज के खास प्रबंध नहीं 
सरकारी अस्पतालों में एचआईवी रोगी की सर्जरी व उपचार के लिए खास प्रबंध नहीं है। लिहाजा सभी मरीजों को केजीएमयू में बने एआरटी सेंटर में भेजा जाता है। संक्रमित मरीजों की सर्जरी के लिए भी कोई भी ठोस इंतजाम नहीं है।  
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