फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सिंचाई विभाग के कर्मचारियों ने कब्जा करा दी शारदा नहर की करोड़ों की जमीन 

Sat, 07 Dec 2019 11:37 AM IST
विक्रांत चतुर्वेदी अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन

सिंचाई विभाग के कर्मचारियों ने पीजीआई के कल्ली पश्चिम में स्थित शारदा नहर की करोड़ों की 2.558 हेक्टेयर जमीन बिल्डर को कब्जा करा दी। अधिकारियों ने जांच शुरू की तो हकीकत सामने आई। मामले में शुक्रवार को सिंचाई विभाग के जिलेदार की तहरीर पर विभाग के छह कर्मचारियों व बिल्डर के निदेशक के खिलाफ पीजीआई थाने में जालसाजी, सरकारी संपत्ति हड़पने का मुकदमा दर्ज किया गया। शासन के निर्देश पर छह में से चार कर्मचारियों को निलंबित कर दो के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की गई है।

विज्ञापन


सिंचाई विभाग के तृतीय उपखंड के जिलेदार अनिल कुमार शुक्ला के मुताबिक कल्ली पश्चिम में शारदा नहर गुजरती है। इसके पास ही ओमेक्स लि. ने अपार्टमेंट बनवाया है। कर्मचारियों ने जालसाजी करते हुए नहर की 2.558 हेक्टेयर जमीन सड़क बनाने के लिए बिल्डर को कब्जा करा दी। जांच में पता चला कि इसमें तत्कालीन अधीक्षण अभियंता विद्यासागर सिंह, अधिशासी अभियंता योगेश रावल, सहायक अभियंता एसएन मौर्य, उप राजस्व अधिकारी कृष्ण गोपाल, जिलेदार देवी प्रसाद सिंह, सींचपाल केशव मणि त्रिपाठी ने अहम भूमिका निभाई। जिलेदार ने शासन के निर्देश पर सभी अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ ही ओमेक्स लि. के निदेशक के खिलाफ तहरीर दी, जिस पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया।

गोलमाल करने के लिए बनाए जाली दस्तावेज 

आजादी से पहले यह नहर इसलिए बनवाई गई थी कि इलाके के किसानों के खेतों को सिंचाई के लिए पानी मिल सके। हालांकि जिस विभाग को इस नहर की रखवाली और मरम्मत की जिम्मेदारी सौंपी थी, उसके ही अधिकारियों व कर्मचारियों ने नहर की जमीन पर अवैध कब्जा करा दिया। इसके लिए जाली दस्तावेज तैयार किए, ताकि नहर की जमीन को विभाग के क्षेत्राधिकार से अलग किया जा सके। अपनी सीमाओं का उल्लंघन करते हुए इन अधिकारियों ने अनापत्ति प्रमाण जारी कर कल्ली माइनर का लैंड यूज भी बदल दिया। 

बन गई 15 मीटर चौड़ी सड़क

जांच में सामने आया कि बिल्डर ने 2.558 हेक्टेयर जमीन पर 15 मीटर चौड़ी सड़क  बनवाई। 19 मई को यह मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने आया। इसके बाद जांच शुरू की गई, जिसमें फर्जीवाड़ा सामने आया है।


सीएम, मंत्री सहित उच्चाधिकारियों को भेजी रिपोर्ट

जिलेदार के मुताबिक जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट मुख्यमंत्री व विभागीय मंत्री सहित कई उच्चाधिकारियों को भेजी गई। इसके बाद शासन के निर्देश पर उप राजस्व अधिकारी कृष्ण गोपाल, जिलेदार देवी प्रसाद सिंह, सींचपाल केशवमणि त्रिपाठी व सहायक अभियंता एसएन मौर्य को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। वहीं, अधीक्षण अभियंता विद्यासागर सिंह और अधिशासी अभियंता योगेश रावल के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का निर्णय किया गया।
विज्ञापन

सड़क मरम्मत व चौड़ीकरण के नाम पर किया खेल

प्रभारी निरीक्षक पीजीआई अशोक कुमार सरोज ने बताया कि तहरीर के मुताबिक सिंचाई विभाग के छह अधिकारियों ने नहर की पटरियों की मरम्मत और चौड़ीकरण के नाम पर फर्जी आदेश तैयार कराए। इसके बाद जमीन पर बिल्डर का कब्जा करा दिया। विभागीय जांच में साफ हुआ कि 7 मई 2018 को सहायक अभियंता एसएन मौर्य, उपराजस्व अधिकारी कृष्ण गोपाल, जिलेदार देवी सिंह, सींचपाल केशवमणि त्रिपाठी ने स्थलीय निरीक्षण किया। इन्होंने अपनी रिपोर्ट में रायबरेली रोड से कल्ली पश्चिम जाने वाली माइनर को समतल करते हुए दोनों पटरियों को चौड़ा कर सड़क की मरम्मत व पुनर्निर्माण के लिए बिल्डर के पक्ष में अनापत्ति प्रमाण पत्र अधिशासी अभियंता योगेश रावल से 8 जून 2018 को हासिल कर लिया। यह प्रमाण पत्र मिलते ही बिल्डर ने हॉटमिक्स सड़क बना दी। क्षेत्राधिकारी कैंट डॉ. बीनू सिंह को मामले की जांच सौंपी गई है।


कंपनी का दावा- डीएम व सिंचाई विभाग के निर्देश पर बनवाई सड़क

ओमेक्स लिमिटेड के प्रशासनिक अधिकारी मनोज तिवारी ने कहा कि कल्ली पश्चिम में सिंचाई विभाग की कल्ली नहर अभिलेखों में वर्षों से बंद है। गांव वाले आवागमन के लिए इसका प्रयोग कर रहे थे जो संकरा व टूटा-फूटा है। यहां के लोगों, प्रधान, ब्लॉक प्रमुख ने कई बार डीएम व सिंचाई विभाग से इस रास्ते को बनवाने की मांग कर रहे थे। इस रास्ते का स्वामित्व व निर्माण की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग की है। चूंकि कंपनी की हाइटेक टाउनशिप परियोजना कल्ली पश्चिम में चल रही है। इसलिए डीएम व सिंचाई विभाग ने कंपनी को सड़क निर्माण व चौड़ीकरण के लिए निर्देश दिया था। सिंचाई विभाग की एनओसी मिलने के बाद कंपनी ने करोड़ों रुपये खर्च कर सड़क का निर्माण कराया। कंपनी को इस सड़क की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने मुकदमा दर्ज कराने से पहले न तो कंपनी का पक्ष सुना और न ही जनप्रतिनिधियों की ओर से दिए गए प्रत्यावेदनों पर विचार किया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें