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एकेटीयू में फंसे 35 हजार स्टूडेंट्स के रिजल्ट

Thu, 15 Sep 2016 12:48 PM IST
शैलेश अरोड़ा/अमर उजाला, लखनऊ
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डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय से संबद्घ कॉलेजों से पढ़ाई कर चुके करीब 35 हजार स्टूडेंट्स रिजल्ट अधूरा होने से परेशान हैं। ये स्टूडेंट्स पिछले कई सालों से अपना रिजल्ट सुधरवाने के लिए कभी कॉलेज तो कभी विवि का चक्कर लगाते हैं, लेकिन ऑर्डिनेन्स और रिकॉर्ड के फेर में इनका रिजल्ट नहीं सुधर पा रहा है। 
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इनमें से बहुत से स्टूडेंट्स तो बीटेक, एमबीए, एमसीए करने के बाद भी नौकरी में अपनी डिग्री का इस्तेमाल तक नहीं कर सकते। इस समस्या से जूझने वालों में 2010 बैच के आसपास और उसके बाद के स्टूडेंट्स हैं। ज्यादा संख्या 2010 से 2013 बैच के स्टूडेंट्स की है।असल में यह समस्या उस समय से शुरू हुई जब उत्तर प्रदेश प्राविधिक विश्वविद्यालय को दो हिस्सों में बांटा गया।

16 फरवरी, 2010 में यूपीटीयू का नाम बदलकर गौतम बुद्घ प्राविधिक विश्वविद्यालय (जीबीटीयू) करने के साथ महामाया टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एमटीयू) की स्थापना हुई। इसके साथ ही यूपीटीयू से संबद्घ कॉलेजों को इन दोनों विश्वविद्यालयों में बांट दिया गया। जीबीटीयू व एमटीयू दोनों का ही ऑर्डिनेन्स अलग-अलग था।
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31 अक्तूबर, 2013 को एक बार फिर से इन दोनों विश्वविद्यालयों को एक कर दिया गया। ऐसे में जो छात्र उस समय एमटीयू से संबद्घ कॉलेजों में पढ़ रहे थे, दोनों विश्वविद्यालयों के विलय होने के बाद उनके ऑर्डिनेन्स आपस में नहीं मिल पाए। एकेटीयू के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक के अनुसार परीक्षा से जुड़े नियम दोनों विश्वविद्यालयों में अलग थे।

ऐसे में जिन छात्रों के रिजल्ट अधूरे हैं उनके विभिन्न पेपर का मिलान करना मुश्किल हो रहा है। विवि सूत्रों की मानें तो एकेटीयू के सामने एक बड़ी चुनौती एमटीयू के रिकॉर्ड इकठ्ठा करने की है। अभी तक एमटीयू का बहुत सा रिकॉर्ड एकेटीयू के पास नहीं है। ऐसे में यदि 2010 से 2013 के बीच का कोई मामला आता है तो उसका रिकॉर्ड ढूंढना मुश्किल हो जाता है। स्थिति यह है कि उस समय के पंजीकृत छात्र का रिजल्ट सुधारने में विश्वविद्यालय को महीनों का समय लग जाता है। 
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विवि ‘यूनिवर्सिटी अब कॉलेज के द्वार’ अभियान

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पूर्व में विवि ने इसके लिए कुछ कैम्प लगवाए थे, लेकिन 35 हजार से अधिक छात्रों का रिजल्ट अब भी सुधरना बाकी है। कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि वह इस समस्या का समाधान प्राथमिकता पर करने के लिए प्रयास कर रहे हैं। बताया कि इसके लिए विवि ‘यूनिवर्सिटी अब कॉलेज के द्वार’ अभियान चलाएगा। इसके लिए अधूरे टेब्यूलेशन रजिस्टर निकलवाकर एक्टिव एनरोलमेंट वाले स्टूडेंट्स की समस्याएं सुनी जाएंगी।

इसके तहत सभी कॉलेजों में विवि द्वारा कैम्प लगवाए जाने हैं। जो समस्या कॉलेज से संबंधित होगी उसका तत्काल वहीं निस्तारण होगा। इसके अलावा अन्य केस का समाधान दो माह के अंदर कर दिया जाएगा। इस अभियान के लिए चार जोनल कोऑर्डिनेटर नियुक्त किए जा चुके हैं। 10 दिन के अंदर ही यह अभियान शुरू करने का प्रयास है।
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