लॉ के क्षेत्र में रोज नए फैसले आते हैं। उनके अध्ययन के लिए विधि के छात्रों को हर साल नई किताबें उपलब्ध करानी चाहिए। मगर लखनऊ विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी में पिछले आठ सालों से लॉ की नई किताब नहीं आई है।
लॉ स्टूडेंट्स ने कुलपति प्रो. एसपी सिंह को ऐसी तमाम समस्याएं गिनवाईं। छात्रों की मांग पर वीसी सोमवार को उनकी समस्याएं सुनने न्यू कैंपस पहुंचे थे।
स्टूडेंट्स ने कहा कि कंप्यूटर लैब के नाम पर उनसे सालाना दो हजार रुपये लिए जाते हैं। इसकेे बावजूद उन्हें यह सुविधा नहीं मिलती। विभाग में न तो ऑडिटोरियम है और ना ही मूट कोर्ट।
ग्राउंड की सफाई शिक्षक और स्टूडेंट चंदा लगाकर करते हैं। कुलपति ने इसके लिए जिम्मेदारों को फटकार लगाई और विद्यार्थियों को जल्द समस्याएं दूर करने का आश्वासन दिया।
लविवि के न्यू कैंपस में शुक्रवार को विभिन्न समस्याओं को लेकर विद्यार्थियों ने कुलपति का घेराव किया था। सोमवार को उन्होंने इसके लिए माफी मांगी।
बदलेगा ज्यूरिस हॉल
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वीसी ने उन्हें क्षमा कर दिया। वहीं कुलपति ने डीन आरके सिंह और शिक्षकों संग बैठक की, जिसमें उन्होंने छोटी-छोटी समस्याएं दूर न करने की वजह से जिम्मेदारों को लताड़ा।
विद्यार्थियों ने विधि संकाय में ऑडिटोरियम न होने का मुद्दा उठाया। इस पर कुलपति ने बताया कि संकाय के ज्यूरिस हाल को नया रूप दिया जा रहा है। इसके बाद इसमें 200 से 250 विद्यार्थी बैठ सकेंगे।
इसका प्रस्ताव बन चुका है और इसी महीने काम भी शुरू हो जाएगा। स्टूडेंट्स ने कुलपति को बताया कि इस साल संकाय ने इंटरनेशनल मूट कोर्ट में इंग्लैंड को हराकर दूसरा स्थान हासिल किया है।
देश में किसी भी मूट कोर्ट प्रतियोगिता में भाग लेने पर विद्यार्थियों को टीए-डीए नहीं दिया जाता है। इस पर कुलपति ने विवि के खिलाड़ियों की भांति मूट कोर्ट में भाग लेने वाले विद्यार्थियों के लिए टीए-डीए की व्यवस्था करने का निर्देश दिया।
लाइब्रेरी का समय बढ़ेगा
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कुलपति ने विद्यार्थियों की मांग पर लाइब्र्रेरी का समय सुबह आठ से सूर्यास्त तक करने का निर्देश दिया। साथ ही उन्होंने लाइब्रेरी में फोटोकॉपी मशीन लगाने का निर्देश भी दिया।
कुलपति ने कहा कि अब पुस्तकालय में केंद्रीकृत खरीद में टैगोर लाइब्रेरी किताबें खरीदेगी, लेकिन विधि संकाय की किताबों की डिलीवरी न्यू कैंपस में होगी। अभी तक ये किताबें एक साल तक टैगोर में रहती थीं।
विद्यार्थियों ने कहा कि जब तक नए ऑडिटोरियम का निर्माण नहीं होता वे शिल्पकला महाविद्यालय की तर्ज पर ओपन ऑडिटोरियम बनवा दें। कुलपति ने विद्यार्थियों की बात मानते हुए इसका निर्माण कराने का आश्वासन दिया।
कुलपति ने न्यू कैंपस के प्लेग्राउंड को दुरुस्त कराने के लिए भी कहा। इसके अलावा सांस्कृतिक और खेल प्रतियोगिता के आयोजन के लिए उन्होंने कुल मिलाकर 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता भी दी।