लखनऊ विश्वविद्यालय इस साल नए दाखिलों से पहले पीएचडी ऑर्डिनेंस में बदलाव करने जा रहा है। इस बदलाव के बाद पीएचडी पूरी करने की अधिकतम अवधि में छूट मिल सकेगी। विश्वविद्यालय विशेष परिस्थितियों में इस अवधि में कुछ छूट देने पर विचार कर रहा है। एलयू ने यूजीसी का ऑर्डिनेंस ज्यों का त्यों लागू कर दिया था जिससे कई बिंदुओं पर स्थिति साफ नहीं है। पीएचडी ऑर्डिनेंस की बैठक में इसके अलावा कई अन्य बदलावों पर चर्चा होनी है।
विश्वविद्यालय ने पिछले शैक्षिक सत्र से अपने यहां पीएचडी का नया आर्डिनेंस लागू किया। दाखिले में होने वाली देरी को देखते हुए नया ऑर्डिनेंस तैयार करने के बजाय यूजीसी का ऑर्डिनेंस पूरी तरह से लागू कर दिया गया। नए आर्डिनेंस में पीएचडी की न्यूनतम अवधि तीन और अधिकतम छह साल रखी गई है। इस अवधि में महिलाओं को मातृत्व अवकाश तथा दिव्यांगों की सहूलियत के लिए दो-दो साल छूट देने का प्रावधान है।
इसके अलावा अन्य शोधार्थियों को कोई छूट नहीं दी गई। जबकि इससे पहले के आर्डिनेंस में लविवि कुलपति को यह अधिकार था कि सभी की सहमति से अवधि को कुछ समय के लिए बढ़ा सकें। यही व्यवस्था एक बार फिर से लागू करने की तैयारी है। यह बढ़ी हुई अवधि कितनी होगी, इसका फैसला अगले सप्ताह होने वाली बैठक में होगा।
इसके साथ ही किसी शिक्षक के सेवानिवृत्त होने, उसके विदेश जाने आदि की अवधि में शोधार्थी किसके निर्देशन में पीएचडी करेगा, शोधार्थियों की अधिकतम संख्या में यह शोधार्थी शामिल होगा या फिर नहीं, अधिकृत जर्नल किसे मानेंगे, इन सभी बिंदुओं पर बैठक में चर्चा होने के बाद बदलाव किया जाएगा।