लखनऊ विश्वविद्यालय में वर्षों से छात्रसंघ चुनाव का इंतजार कर रहे छात्रनेताओं की इच्छा जल्द ही पूरी होती नजर आ रही है। पीएचडी और एमफिल के दाखिलों बाद विवि में छात्रसंघ चुनाव कराए जा सकते हैं।
इसके लिए कुलपति प्रो. एसबी निमसे के निर्देश पर उच्चस्तरीय कमेटी का गठन कर दिया गया है। कमेटी एक बार फिर से चुनाव के लिए विवि का वर्गीकरण कर मॉडल तय करेगी।
इतना ही नहीं, चुनाव की उम्मीद में ऑब्जर्वर के नाम भी तय कर दिए गए हैं। कमेटी की पहली बैठक 17 अक्तूबर को होगी।
पूर्व चीफ जस्टिस करेंगे कमेटी की अध्यक्षता छात्रनेताओं की मांग और शासन के निर्देशानुसार विवि ने छात्रसंघ चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है।
इसके लिए कुलपति ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व कार्यवाहक चीफ जस्टिस विष्णु सहाय की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी बनाई है। इसमें प्रदेश के पूर्व डीजीपी अतुल और कुलपति रह चुके प्रो. भूमित्र देव भी होंगे।
प्रो. निमसे ने बताया कि 17 अक्तूबर को कमेटी के सदस्यों साथ पहली बैठक होनी है। कमेटी दो फेज में काम करेगी। पहला विवि का वर्गीकरण और दूसरा चुनाव को लिंगदोह कमेटी की संस्तुतियों के अनुसार कराना सुनिश्चित करेगी। प्रो. निमसे ने कहा कि चुनाव होने की स्थिति में कमेटी के यही तीन सदस्य ऑब्जर्वर की भूमिका भी निभाएंगे।
पहले विवि ने लिंगदोह कमेटी की संस्तुतियों के अनुसार खुद को अप्रत्यक्ष चुनाव के लिए उपयुक्त पाया। इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी गई। जब छात्रनेताओं को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने प्रत्यक्ष चुनाव कराने की मांग लेकर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया।
इसके बाद विवि ने उनके दबाव में शासन को दूसरा पत्र लिखा और प्रत्यक्ष चुनाव कराने की बात कही। विवि का कहना था कि एलयू में छात्रसंघ चुनाव को लेकर हाईकोर्ट में स्टे लगा हुआ है।