लखनऊ विश्वविद्यालय में सत्र 2018-19 में एलएलबी ऑनर्स की सीटों की संख्या 120 से बढ़कर 320 हो सकती हैं। यहां वर्ष 2001 से ही एलएलबी ऑनर्स में 320 सीट की मान्यता है। इसके बावजूद 120 विद्यार्थियों को ही दाखिला दिया जा रहा है।
इस सत्र में यह मुद्दा उठा था। विश्वविद्यालय प्रशासन अभी तक बीसीआई को पत्र लिखकर स्थिति साफ करने की बात कह रहा था। अब बीसीआई के पुराने पत्र को मान्यता देते हुए सीटों की संख्या तय करने की जिम्मेदारी प्रवेश समिति को दी गई है।
माना जा रहा है एलएलबी ऑनर्स की सीट मे बढ़ोतरी जरूर होगी। विश्वविद्यालय में हर साल सबसे ज्यादा मारामारी एलएलबी ऑनर्स में दाखिले को लेकर मचती है। इस साल एलएलबी की हर सीट पर 22 दावेदार थे।
विवि पिछले काफी समय से हर साल एलएलबी कोर्स में 120 दाखिले ले रहा है। विवि में मौजूद दस्तावेज के अनुसार लविवि को वर्ष 2001 में पांच साल के लिए 1600 सीट के लिए मान्यता मिली थी। इस लिहाज से विश्वविद्यालय हर साल 320 सीट पर दाखिला ले सकता है।
बढ़ी सीट से दूर हो सकती है विवि की तंगी
‘अमर उजाला’ ने जुलाई 2017 में यह मुद्दा उठाया था। इसके बाद लविवि ने सीट संख्या का निर्धारण करने से पहले बीसीआई से सलाह लेने की बात कही थी। अब विधि संकाय के शिक्षकों से वार्ता के बाद इस बात पर लगभग सहमति बन गई है कि एलएलबी ऑनर्स में 320 सीट की मान्यता है। इसलिए अब यह मामला सीधे प्रवेश समिति के पास भेजा जाएगा ताकि नए सत्र के लिए सीट संख्या का निर्धारण हो सके।
विश्वविद्यालय का अनुदान फ्रीज होने की वजह से हमेशा आर्थिक तंगी बनी रहती है। सेल्फ फाइनेंस कोर्सेज के सहारे कुछ रकम जुटाई जाती है। विवि में एलएलबी ऑनर्स ही एकमात्र सेल्फ फाइनेंस पाठ्यक्रम है जिसमें दाखिले के लिए मारामारी मची रहती है।
10 सेमेस्टर के इस पाठ्यक्रम में स्टूडेंट्स से प्रति सेमेस्टर 25 हजार रुपये फीस ली जाती है। 120 सीट के हिसाब से कोर्स में एक समय में अधिकतम 600 स्टूडेंट्स हो सकते हैं। इस हिसाब से विवि को इस पाठ्यक्रम से सालाना डेढ़ करोड़ रुपये की धनराशि फीस से मिलती है।
इससे फैकल्टी के शिक्षकों का वेतन और अन्य खर्च आसानी से निकल आता है। सीटों की संख्या 320 होने पर एक समय में कोर्स में 1600 स्टूडेंट्स होंगे। इस तरह से विवि को ढाई गुना ज्यादा मतलब तीन करोड़ 75 लाख रुपये की आमदनी हो सकती है।
बीए-एलएलबी और बीकॉम-एलएलबी शुरू करने की भी चर्चा
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एलएलबी ऑनर्स की सीट बढ़ाने पर अंतिम मुहर प्रवेश समिति को लगानी है। इससे पहले संकाय में सभी सीटों पर एलएलबी ऑनर्स में दाखिले करने के बजाय बीए-एलएलबी और बीकॉम-एलएलबी पाठ्यक्रम शुरू करने की चर्चा हो रही है।
एलएलबी ऑनर्स भी इंटीग्रेटेड कोर्स है। इसलिए बीए-एलएलबी और बीकॉम-एलएलबी पाठ्यक्रम शुरू करने में कोई विधिक अड़चन नहीं है। समय की मांग को देखते हुए एलएलबी ऑनर्स के मुकाबले स्टूडेंट्स के बीए-एलएलबी और बीकॉम-एलएलबी पाठ्यक्रम ज्यादा पसंद करने की संभावना है।
एलएलबी ऑनर्स की सीटों की संख्या को लेकर संकाय के शिक्षकों के साथ चर्चा हुई है। पुराने शिक्षकों ने गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए सीट कम करने की बात कही थी। नए सिरे से सीट तय करने के लिए यह मुद्दा प्रवेश समिति में रखा जाएगा। प्रवेश समिति की मंजूरी के बाद बढ़ी सीट पर दाखिले हो सकते हैं। - प्रो. आरके सिंह कुलसचिव, लविवि