इसे आयोग की सख्ती कहिए या फिर बदलते परिप्रेक्ष्य में तकनीक का सहारा। विधानसभा चुनाव में प्रचार का तौर-तरीका बिल्कुल बदला हुआ सा है। पार्टी दफ्तर को छोड़ कर राजधानी में न तो कहीं बैनर-पोस्टर नजर आ रहे हैं, न ही नुक्कड़ सभाओं में किसी पार्टी-प्रत्याशी की रुचि नजर आ रही है।
दरअसल इस बार राजनीतिक पार्टियां प्रचार के लिए सोशल मीडिया पर ज्यादा एक्टिव हैं। फेसबुक-वॉट्सएप पर चुनावी चकल्लस जारी है। इसके अलावा लाउस्पीकर, ई-रिक्शे का इस्तेमाल भी पार्टियां कर रही हैं।
कैंट में काफी तलाश के बाद तीन अलग-अलग पार्टियों के गिने-चुने झंडे और पोस्टर ही दिखे। कैंट से सपा-कांग्रेस गठबंधन से मुलायम की बहू अपर्णा यादव, भाजपा से रीता बहुगुणा जोशी और बसपा से योगेश दीक्षित मैदान में हैं।
चाय की दुकानों पर होने वाली चुनावी चकल्लस इस बार सोशल मीडिया पर नजर आ रही है। रोज नए-नए वॉट्स ग्रुप बना कर लोगों को जोड़ा जा रहा है। हर कोई अपने-अपने स्तर से प्रत्याशियों को जिताने की अपील कर रहा है।
इसी तरह एफबी पोस्ट पर भी नए-नए अंदाज में चुनावी पोस्ट की भरमार है। सभी प्रमुख पार्टियां वीडियो, फोटो और मैसेज को अलग तरीके से सोशल मीडिया के जरिए वोटरों में सर्कुलेट कर रही हैं।