बीएसएनएल सहित एयरटेल, वोडाफोन व रिलायंस मोबाइल सेवा के संचालन से जुड़े जिम्मेदार भी मानते हैं कि कॉल ड्रॉप, कॉल जंपिंग की समस्या एक मोबाइल ऑपरेटर के नेटवर्क से दूसरे पर कॉल करने पर आती है। इस दौरान फोन मिलता तो है, लेकिन कॉल रिसीव करते ही कट जाता है।
दो से तीन बार नंबर मिलाने पर ही बात हो पाती है। बीएसएनएल के पूर्वी सर्किल के पीजीएम सतीश कुमार ने समस्या दूर कराने के लिए सिग्नल टावरों की जोनवार निगरानी का निर्देश तकनीकी सेवा से जुड़े अधिकारियों को दिया गया है।
फ्रीक्वेंसी घटा-बढ़ाकर करते हैं कॉल ड्रॉप
टेलीकॉम सेवा से जुड़े अधिकारी बताते हैं कि मोबाइल ऑपरेटरों के सिग्नल रिसीव करने वाले बीटीएस टॉवर का जोन बंटा होता है। एक से दूसरे जोन में जाने पर सिग्नल कमजोर हो सकते हैं, इसी दौरान कनेक्टिविटी की दिक्कत आती है।
निजी ऑपरेटरों का अपने बीटीएस टावर पर नियंत्रण रहता है। इन्हीं टावर से सिग्नल की फ्रीक्वेंसी घटा-बढ़ाकर कॉल ड्रॉप का खेल होता है,जबकि ट्राई का नियम है कि कंपनियां फ्रीक्वेंसी को समान रखेंगी। यह खेल पीक ऑवर में कॉल ट्रैफिक लोड अधिकतम होने पर होता है। बाद में ट्रैफिक कंजेशन की आड़ में कंपनियां खुद को बचा लेती हैं।