राजीव गांधी विद्युतीकरण (दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना में शामिल) में 2012-17 की अवधि में 75 जिलों में 86 परियोजनाओं के लिए 11697.83 करोड़ रुपये अनुमोदित किए गए। इनमें 11 जिले 11वीं पंचवर्षीय योजना, 53 जिले 12वीं पंचवर्षीय योजना और 11 जिले दोनों योजनाओं में शामिल थे। आरईसी ने डिस्कॉम की लापरवाही से 1197.22 करोड़ की प्रतिपूर्ति रोक दी थी। लेखा परीक्षा में दोषपूर्ण वित्तीय प्रबंधन मिला। इसमें डिस्कॉम ने अनुदान उपलब्ध होने के बावजूद आरईसी से ऋण लिया, जिससे सार्वजनिक कोष पर ब्याज का गैरजरूरी भार पड़ा।
जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीनीकरण मिशन
जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीनीकरण मिशन के सहयोग से यूपीएसआरटीसी ने प्रदेश के सात शहरों में बस सेवा के संचालन के लिए छह नगरीय यातायात कंपनियों (यूटीसी) का गठन किया गया था। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित एकीकृत महानगरीय परिवहन प्राधिकरण (यूएमटीए) की सिर्फ तीन बैठकें हुईं, जिससे यूटीसी का निरीक्षण नहीं हो पाया। नगरीय परिवहन निदेशालय को दिया गया 445.67 करोड़ रुपये का इस्तेमाल ही नहीं किया गया। किसी भी यूटीसी ने अनुपूरक लेखा परीक्षा के लिए सीएजी को वित्तीय विवरण नहीं दिए। 2.04 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद बसों में इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम (आईटीएस) नहीं लगाए गए। लखनऊ सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड और कानपुर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड ने अपनी कार्यशाला और कर्मचारी होने के बावजूद ठेकेदार से रख-रखाव और मरम्मत का कार्य कराया। इससे 20.22 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
यूपी प्रोजेक्ट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) ने उप्र राजकीय निर्माण निगम के वर्किंग मैनुअल के प्रावधानों का उल्लंघन किया। सरकार के आदेशों को न मानते हुए 359.85 करोड़ के 434 कार्यों की पीएम-जीएम ने स्वीकृति दी। 65.27 करोड़ का एडवांस अनियमित तरीके से दिया, जो पूरी तरह से गलत था। इसके अलावा आर्किटेक्ट की नियुक्ति, भुगतान में गड़बड़ी और उनके भुगतान में अनियमितता का खुलासा भी कैग ने किया है।
ये भी उठाईं आपत्तियां
उप्र आवास विकास परिषद ने शासनादेश का उल्लंघन करते हुए 20 भूखंडों के विक्रय पर 33.89 करोड़ का अधिभार नहीं वसूला। इससे भूखंड के खरीदारों को फायदा हुआ। उप्र राज्य सड़क परिवहन निगम ने बकाये की वसूली में ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाया, जिससे 16.25 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। मध्यांचल और पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड ने कार्यशील मीटरों को नए मीटरों से बदला जिससे और मीटरों का दोबारा प्रयोग नहीं किया। इससे 3.69 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम के प्रदाय संहिता 2005 के प्रावधानों का पालन न करने के कारण एक उपभोक्ता को 1.28 करोड़ कम का बिल दिया। दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम ने भारतीय रेल झांसी के विद्युत अभियंता का वास्तविक उपभोग के आधार पर बिल बनाया, जिससे 1.20 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ। यह रकम तकनीकी खामियों के कारण वसूली भी नहीं जा सकी।