वाणिज्यकर विभाग को सर्वाधिक 253 करोड़ के राजस्व का नुकसान हुआ। इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) की आड़ में अफसर सरकारी खजाना लुटाते रहे। इसके अलावा कर निर्धारण, सत्यापन और छूट देने में भी जमकर खेल किया गया।
वहीं, देर से टीडीएस जमा करने वाले और टर्नओवर छिपाने वाले कारोबारियों भी विभागीय अफसर खूब मेहरबान रहे। लेखा परीक्षकों ने 2,087 कर निर्धारण मामलों में अनियमितता पाई। व्यापारियों पर अर्थदंड लगाने में अनियमितता से ही खजाने को 112.73 करोड़ की चपत लगी।
भूतत्व एवं खनिकर्म 226.65 करोड़ रुपये का नुकसान
भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग में अनियमितता, खनन पट्टा धारकों से रॉयल्टी, ब्याज एवं जुर्माना और खनिज मूल्य की वसूली न करने के चलते 226.65 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। रिपोर्ट के अनुसार रवन्ना पर्ची के बिना बालू, मौरंग और गिट्टी का परिवहन किया गया। पट्टा धारकों से वसूली की सिफारिश को गंभीरता से नहीं लिया गया।